corona in china: कोरोना के कहर से जूझता चीन, चुनौतियों के चक्रव्यूह के बीच नई थ्यौरियों का जंजाल 

China corona virus outbreak:चीन में कोरोना वायरस का कहर अभी तक कम नहीं हुआ है। चीन के लगभग सभी शहरों में सन्नाटा पसरा है और सबके जेहन में यही सवाल है कि इसका प्रकोप कब खत्म होगा।

corona in china
चीन में कोरोना वायरस का कहर अभी भी जारी है। 

पंकज श्रीवास्तव

चीन इन दिनों नोवेल (नए) कोरोना वायरस के कहर से परेशान है, न सिर्फ़ चीन बल्कि दुनिया के कई देशों में भी ये रोग फैल चुका है, अभी हाल ही में हुई ईरान में 6 और इटली में 2 मौतों ने इन देशों के साथ दुनिया के लिये चिंता की लकीरें खींच दी हैं। इसके अलावा इज़रायल, सिंगापुर, फ्रांस, जापान, थाईलैंड, ताइवान, मलेशिया और हांगकांग में भी मामले दर्ज किये गए हैं।  इटली और ईरान में हुई मौतों के साथ पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया में चीन के बाहर सबसे ज्यादा पीड़ितों की संख्या ने दुनिया को चौकन्ना कर परेशानी में डाल दिया है, यहां पर एक ही दिन में 24 नए मामलों से पूरा दक्षिण कोरिया सकते में है। 

एक के बाद एक नई थ्यौरियों का जन्म


इन खबरों से ऐसा लगता है मानों खतरा अभी टला नहीं है। अगर हम अबतक नोवेल कोरोना वायरस से हुई मौतों के बारे में बात करें तो अबतक करीब 2400 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें से हुपे प्रांत में मरने वालों की संख्या 2250 है वहीं इसके कुल मरीज़ों की संख्या 77,000 है जिसमें से चीन की मुख्य भूमि में इनकी संख्या 76,288 है। वहीं जिनमें ये वायरस पाया गया है उनकी संख्या 11,477 है लेकिन एक बड़ी संख्या में मरीज़ स्वस्थ हो कर वापस अपने घरों को लौट रहे हैं इनकी संख्या 20,800 है। लेकिन इस बीच चीन को सबसे ज्यादा नुकसान अफ़वाहों के बाज़ार में बढ़ती गर्मी से हो रहा है जहां पर कई ऐसी थ्योरियों का जन्म हो रहा है जिसमें ज़रा भी सच्चाई नहीं है।  

गर्मी में प्रकोप होगा कम?

नए मामलों के सामने आने के बाद ये भी कहा जा रहा है कि अभी वायरस से पीड़ितों की संख्या और बढ़ सकती है लेकिन अगर जानकारों की मानें तो जैसे जैसे गर्मी बढ़ेगी वैसे ही कोरोना वायरस का प्रकोप कम होगा क्योंकि ये वायरस 35 डिग्री के तापमान में मर जाता है। इसका मतलब ये भी है कि दुनिया के गर्म इलाकों में इसके फैलने की आशंका न के बराबर है।  

9 दिनों तक जीवित रहता है वायरस!

वायरस के फैलाव के बारे में जानकारों का कहना है कि ये सार्स बीमारी से भी तेज़ी के साथ फैलता है, सांस के द्वारा, छूने से और सार्वजनिक स्थानों पर ज्यादा जाने से फैलता है, कहा ये भी जा रहा है कि ये वायरस कुछ मीटर की दूरी से हमला करता है, दरवाज़ों के हत्थों, बसों और मेट्रो ट्रेन में सहारे के लिये पकड़े जाने वाली लोहे की छड़ों जैसी जगहों पर ये नौ दिनों तक जीवित रह सकता है, लिफ्ट के अंदर भी सेनेटाइज़र का छिड़काव किया जा रहा है, चीन सरकार ने इसे रोकने के लिये सफ़ाई कर्मचारियों को रसायन के छिड़काव के ख़ास निर्देश दिये हैं, मास्क की उपलब्धता को बढ़ाने के साथ ही हर रिहाइशी इलाके में निवासियों का एक जत्था रिमोट थर्मोमीटर और सेनिटाइज़र के साथ खड़ा रहता है जो हर आने जाने वाले का तापमान रिकार्ड करने के बाद ही उसे अपने इलाके में आने की इजाज़त देता है।

सड़कों पर पसरा है सन्नाटा

 खासकर वूहान में जहां कोरोना वायरस की जन्मस्थली है, सरकार प्रचलन में आने वाली मुद्रा को भी एक जगह इकट्ठा कर किटाणु रहित बनाने के लिये इंफ्रा रेड रौशनी और दूसरी प्रक्रियाओं से गुजारकर वापस प्रचलन में भेज रही है। अगर राजधानी पेइचिंग की बात करें तो यहां पर आम दिनों के मुकाबले बहुत कम लोग सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं, बसें और मेट्रो ट्रेन सभी अपने टाइम से चल रही हैं लेकिन उनमें यात्री नदारद हैं। वसंतोत्सव के दौरान पेइचिंग की सड़कें जितनी वीरान दिखती हैं उससे कुछ अधिक लोग नज़र आ रहे हैं, पिछले दो तीन दिनों से आम दिनों की अपेक्षा करीब दस फीसदी लोग सड़कों और बाज़ारों में दिखाई दे रहे हैं लेकिन जैसे हालात पंद्रह दिन पहले थे उसमें थोड़ा सुधार नज़र आ रहा है, फिर भी ये कहना कठिक है कि हालात पूरी तरह कब सामान्य होंगे, इसके लिये मार्च का महीना निर्णायक साबित हो सकता है। क्योंकि इस समय दक्षिणी और मध्य चीन में तापमान बढ़ने लगता है जिससे लोगों में नोवेल कोरोना वायरस का डर कम होगा और लोगों के सामान्य जीवन की तरफ़ लौटने की संभावना बढ़ेगी।

चीन को 168 बिलियन डॉलर का नुकसान 

जहां तक चीन को कोरोना वायरस से हुए आर्थिक नुकसान की बात है तो कुछ दिनों पहले चाइना टूरिज्म एकेडेमी द्वारा जारी किये गए आंकड़ों के मुताबिक राजस्व में इस वर्ष 21 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है और चीन को करीब 168 बिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। लेकिन चीन इस नुकसान की भरपाई आने वाले समय में कर लेगा ऐसा आर्थिक मामलों के जानकारों का कहना है। 

थ्यौरियों के जंजाल में फंसा है कोरोना

हालांकि चीन सरकार के कोरोना वायरस को रोकने के अथक प्रयासों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी प्रशंसा की है। अगर किसी और देश में ये वायरस फैलता तो इसकी रोकथाम के लिये जो कदम चीन ने उठाए वो उनके लिये मुश्किल होता।   जहां एक तरफ़ इस बीमारी को रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं वहीं दुनिया भर में कयासों का बाज़ार भी गर्म है, कोरोना वायरस के फैलने को लेकर मुख्यत: दो थ्योरी सामने आ रही हैं जिनमें पहली है वूहान में किसी व्यक्ति के चमगादड़ का सूप पीना, हालांकि ये डिश चीन में कहीं और प्रचलित नहीं है लेकिन ये वूहान में प्रचलित है, दूसरी थ्योरी कहती है कि ये चमगादड़ से उसे खाने वाले साँप में पहुंचा और उस साँप को जिस आदमी ने खाया, ये वहां से पूरी दुनिया में फैला।  

कोराना के कहर के बीच राहत की आस

बहरहाल, इस समय चीन सरकार की पुरज़ोर कोशिश है कि जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी नोवेल कोरोना वायरस से चीनी जनता को निजात दिलाई जा सके, अगले 18 महीनों में नोवेल कोरोना वायरस का टीका बनाने के दावे किये जा रहे हैं लेकिन उससे पहले ही गर्मी शुरु होने के बाद इस वायरस का असर बहुत हद तक कम होने की संभावना जताई जा रही है। चीन ने जिस तत्परता के साथ नोवेल कोरोना वायरस से जंग लड़ी और उसे ज्यादा फैलने से रोकने के उपाय अपनाए इसकी दुनिया भर में प्रशंसा हो रही है। चीन के इन प्रयासों को देखकर संभावना जताई जा रही है कि इस रोग का जल्दी ही निवारण ढूंढ लिया जाएगा।

(लेखक चाइना मीडिया ग्रुप से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार हैं। )
 

डिस्क्लेमर: टाइम्स नाउ डिजिटल अतिथि लेखक है और ये इनके निजी विचार हैं। टाइम्स नेटवर्क इन विचारों से इत्तेफाक नहीं रखता है।

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