पाकिस्तान: इस जिले के मौलवियों ने महिलाओं के बाजारों में जाने पर लगाया प्रतिबंध, लोगों ने की तालिबान से तुलना

पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा के कर्रम जिले में कुछ मौलवियों के एक संगठन ने महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। हालांकि पुलिस ने इससे इनकार किया है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर 

नई दिल्ली: पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा के कुर्रम आदिवासी जिले के पाराचिनार में स्थानीय मौलवियों और बुजुर्गों के एक संगठन ने बिना पुरुष साथी के महिलाओं के शॉपिंग सेंटर और बाजारों में जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' से बात करते हुए स्थानीय निवासियों ने कहा कि हुसैनी तहरीक संगठन ने अपने फेसबुक पेज के साथ-साथ व्हाट्सएप पर भी निर्णय साझा किया है और इसे अपने सदस्यों द्वारा सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से शेयर किया गया है।

उन्होंने कहा, 'हम तालिबान के शासन में नहीं रह रहे हैं। हम पाकिस्तान में हैं लेकिन कुछ लोगों ने अफगानिस्तान में चल रही घटनाओं से प्रेरणा ली है जहां महिलाओं को शटलकॉक बुर्का पहनने और पुरुष साथी के बिना बाहर नहीं जाने के लिए कहा गया है।'

हुसैन तहरीक का नेतृत्व एक स्थानीय मौलवी और पूर्व सीनेटर मौलाना आबिद हुसैनी करते हैं, जिन्हें स्थानीय रूप से एक प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है। उन्हें क्षेत्र के अन्य मौलवियों का समर्थन प्राप्त है। यहां यह उल्लेखनीय है कि कुर्रम के निवासियों को पूर्व फाटा में एकमात्र लोग माना जाता है जो तालिबान के खिलाफ हथियार उठा चुके थे और परिणामस्वरूप उन्हें बहुत नुकसान हुआ था।

एक अन्य स्थानीय ने कहा, 'कुर्रम जिले में अधिकांश शिक्षित लोग इस तरह के प्रतिबंधों के खिलाफ थे। न केवल दोस्त बल्कि दुश्मन भी अफगानिस्तान में तेजी से तालिबान की बढ़त से प्रभावित हैं। लेकिन कुर्रम पाकिस्तान का हिस्सा है और अधिकारियों को इन स्वयंभू सुधारवादियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।' एक अन्य स्थानीय ने दावा किया कि संगठन ने चेतावनी दी है कि अकेले बाजारों में जाने वाली महिलाओं से सख्ती से निपटा जाएगा और इस अनादर के लिए कोई और नहीं बल्कि उनके पति और परिवार के सदस्य जिम्मेदार होंगे। 

संपर्क किए जाने पर उपायुक्त (डीसी) कुर्रम अफाक वजीर ने 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' को बताया कि यह कुछ बदमाशों का मजाक था और पाराचिनार और कुर्रम जिले में हुसैनी तहरीक भी सभी को अच्छी तरह से नहीं पता। उन्होंने कहा, 'यह लगभग 14-15 लोगों का एक तुच्छ संगठन है जो प्रसिद्ध नहीं हैं। किसी ने इस फैसले को प्रसारित किया लेकिन जमीन पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है और महिलाएं बिना किसी रुकावट के खुलेआम बाजारों में जा रही हैं। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मौलवियों ने जिले में महिलाओं पर ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है और यह क्षेत्र पूरी तरह से शांतिपूर्ण है।'

कुर्रम अफगानिस्तान के खोस्त प्रांत के निकट स्थित एक सीमावर्ती जिला है और यह अफगानिस्तान के साथ प्राचीन व्यापार मार्गों में से एक है।

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