ईरानी मिसाइल हमले से कैसे बच निकले अमेरिकी सैनिक? ट्रंप ने बताया- किसी को नहीं आई खरोंच

No Damage to US in Iran missile Attack: सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान ने अमेरिका पर मिसाइलों से जवाबी कार्रवाई की लेकिन अमेरिकी सैनिक इस हमले से बच निकले।

American soldiers escaped from Iranian missile attack
ईरानी हमले से ऐसे बच निकले अमेरिकी सैनिक 

नई दिल्ली: कासिम सुलेमानी की मौत के बाद बुधवार तड़के ईरान ने ताबड़तोड़ मिसाइल हमले से इराक स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर पलटवार किया। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने करीब एक दर्जन से ज्यादा मिसाइलें अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दागीं और दावा किया कि कार्रवाई में 80 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। इसी के साथ घोषणा की गई की ईरान ने सुलेमानी की मौत का बदला ले लिया है हालांकि अमेरिका हमले के बाद शुरुआत में खामोश रहा और कुछ घंटों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मीडिया के सामने आए। उन्होंने बताया कि ईरान के हमले में कोई भी अमेरिकी सैनिक नहीं मारा गया है।

भारतीय समयानुसार रात करीब 10 बजे डोनाल्ड ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि ईरान के हमले में अमेरिकी सैन्य अड्डों को मामूली नुकसान पहुंचा है और किसी भी अमेरिकी नागरिक या सैनिक की जान नहीं गई है। इस बीच हर किसी के दिमाग में यह सवाल हो सकता है कि आखिर अमेरिकी सैनिक मिसाइल हमले में सुरक्षित कैसे बच गए। दरअसल जब तक ईरान की मिसाइलें दागे जाने के बाद अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचतीं उससे पहले ही अमेरिकी सैनिकों को इस हमले की जानकारी हो चुकी थी।

अमेरिका के अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की बदौलत ऐसा संभव हो सका जिसने पहले ही ईरानी मिसाइलों के हमले को भाप लिया था। सैनिकों तक समय से मिसाइल हमले की सूचना पहुंच गई और वह बंकरों में जाकर छिप गए। इस तरह किसी सैनिक को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। इसके अलावा अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन अपनी खुफिया सूचनाओं के आधार पर अमेरिकी सैनिकों को लगातार आगाह भी कर रहा था।

अर्ली वॉर्निंग सिस्टम: राष्ट्रपति ट्रंप ने सैनिकों की जान बचाने के लिए उपयोगी साबित हुए इस सिस्टम का जिक्र अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में किया। डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार इराक में अमेरिकी सैन्य बेस से करीब 6 हजार मील की दूरी पर अमेरिका के मैरीलैंड में एक सेंटर है जहां पर अर्ली वॉर्निंग सिस्टम की व्यवस्था की गई है।

मेरीलैंड में नैशनल सिक्यॉरिटी एजेंसी के बेस पर डिफेंस स्पेशल मिसाइल ऐंड एरोस्पेस सेंटर सैटेलाइट्स, रेडार और हीट डिटेक्शन की मदद से जानकारियां जुटाई जाती हैं। इसी सिस्टम की मदद से लॉन्च के समय ही अमेरिकी सैनिकों तक हमले की जानकारी पहुंचा दी गई।

यह सेंटर पेंटागन के अंतर्गत 24 घंटे पूरे साल काम करता है और इससे पहले 1970 में शीतयुद्ध और 1991 में गल्फ वॉर के दौरान भी इस अमेरिकी सेंटर ने अहम भूमिका निभाई थी।

क्या इराक ने अमेरिका को बताया? कथित तौर पर कुछ ऐसी रिपोर्ट्स भी निकलकर सामने आ रही हैं कि ईरान ने पहले ही इराक सरकार को हमले के बारे में बता दिया था कि वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाएंगे। इराकी पीएम ने खुद इसकी जानकारी दी थी और यहां से यह सूचना अमेरिका को लीक किए जाने की खबर सामने आ रही है। कहा जा रहा है हमले से पहले और बाद में अमेरिका और इराक एक दूसरे के संपर्क में थे।

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