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क्या डील के करीब आ गए हैं US-ईरान? 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' पर ट्रंप के फैसले, अराघची के चीन दौरे में छिपा है संकेत

अराघची का चीन दौरा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बीजिंग जाने वाले हैं।ट्रंप का चीन दौरा 14-15 मई को हो रहा है। इस यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। इससे पहले अराघची रूस होकर आए हैं।रूस ने ईरान को हरसंभव मदद देने की बात कही है और कहा है कि वह उसके साथ खड़ा है।

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Photo : AP
चीन पहुंचे हैं ईरान के विदेश मंत्री अराघची।
Written by: Alok Rao
Updated May 6, 2026, 12:34 IST

Iran-US Peace Deal: ईरान-अमेरिका युद्ध बड़ा अपडेट आया है।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल अपने प्रोजेक्ट फ्रीडम पर रोक लगा दी है।अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने कहा है कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव को।देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाहर ईरानी जहाजों का ब्लॉकेड जारी रहेगा।यानी खर्ग और बंदर अब्बास जैसे बंदरगाहों से ।तेल और गैस लेकर निकलने वाले जहाज आगे बढ़ नहीं पाएंगे। इस बीच, बड़ी खबर यह भी है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची चीन पहुंच गए हैं।चीन में उनकी मुलाकात विदेश मंत्री वांग यी से होनी है।

हाल ही में रूस होकर आए हैं अराघची

जाहिर है कि इस मुलाकात के दौरान पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के ताजा हालातों पर चर्चा होगी।अराघची, यूएस के नेवल ब्लॉकेड से पैदा हुई चुनौतियों और इससे निकलने के तरीकों पर चर्चा कर सकते हैं। मौजूदा तनाव के बीच अराघची का यह चीन दौरा काफी अहम माना जा रहा है। उनका यह चीन दौरा ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बीजिंग जाने वाले हैं।ट्रंप का चीन दौरा 14-15 मई को हो रहा है। इस यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी। इससे पहले अराघची रूस होकर आए हैं।रूस ने ईरान को हरसंभव मदद देने की बात कही है और कहा है कि वह उसके साथ खड़ा है।

युद्ध से निकलना चाहते हैं US-ईरान

एक्स्पर्ट का मानना है कि करीब 40 दिनों तक युद्ध लड़ने के बाद ईरान और अमेरिका दोनों इससे निकलना चाहते हैं।युद्ध से निकलने के लिए दोनों की अपनी मजबूरियां हैं।युद्ध की वजह से अमेरिका में महंगाई बढ़ी है।ट्रंप की लोकप्रियता की रेटिंग में कमी आई है।युद्ध को लेकर डेमोक्रेट लगातार उनकी घेराबंदी कर रहे हैं और नवंबर में मिड टर्म चुनाव होने हैं। इसे लेकर ट्रंप में एक घबराहट है और ईरान से वह कोई डील चाहते हैं।दूसरा, चीन दौरे के समय वह ।खुद को एक विजेता और ताकतवर नेता के रूप में पेश करना चाहते हैं।ईरान में यदि वह फंसे रहेंगे तो चीन के साथ बातचीत में वह बात नहीं आ पाएगी ..जो वह चाहते हैं

donald trump

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500 मिलियन डॉलर का नुकसान

तो दूसरी तरफ ईरान भी किसी न किसी स्थायी सीजफायर या शांति समझौते पर पहुंचना चाहता है।यूएस के नेवल ब्लॉकेड से उसे भारी नुकसान हो रहा है।.तेल और गैस के उसके जहाज होर्मुज से तो निकल जा रहे हैं लेकिन यूएस का नेवल ब्लाकेड उन्हें आगे जाने नहीं दे रहा है।. रिपोर्टों की मानें तो इससे ईरान को करीब 500 मिलियन डॉलर का नुकसान रोजाना हो रहा है।ईरान के लिए यह राशि बहुत बड़ी है क्योंकि उसकी पूरी अर्थव्यवस्था तेल और गैस पर टिकी है।उसकी कमाई का जरिया ही यही है। ईरान सॉफ्टवेयर जैसी कोई ऐसी चीज नहीं बनाता जिससे उसकी कमाई हो।सरकार चलाने या युद्ध लड़ने के लिए उसे पैसे चाहिए।ऐसे में यूएस का ब्लॉकेड यदि नहीं हटा तो उसका नुकसान बढ़ता जाएगा।

ईरान का 90 फीसदी तेल एवं गैस खरीदता आया है चीन

ईरान के तेल एवं गैस का सबसे बड़ा खरीदार चीन है।चीन उसका 90 प्रतिशत तेल और गैस खरीदता रहा है।जाहिर है कि इस तेल और गैस के बदले ईरान को ।उससे पैसे या कोई और चीज मिलती होगी।चीन को तेल और गैस मिलना यदि बंद हो जाएगा तो ईरान को पैसे क्यों देगा? हो सकता है कि अराघची इस बारे में चीन से बात करें। और अमेरिका के साथ डील में भी चीन की मदद लें। ईरान के कहने पर चीन उसकी बातों को ट्रंप के समक्ष ज्यादा प्रभावी तरीके से रख सकता है। वह डील में ईरान को ज्यादा रियायत देने के लिए ट्रंप पर थोड़ा-बहुत दबाव भी डाल सकता है। एक संभावित डील की तलाश में परेशान ट्रंप ईरान की कठिन शर्तों के लिए भी सहमत हो सकते हैं।

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ईरान को तोड़ रही यूएस की नेवल नाकेबंदी

यूएस के नेवल ब्लॉकेड से ईरान काफी परेशान है। यह ब्लॉकेड उसे अंदर ही अंदर तोड़ रहा है। एक्सपर्ट मानते हैं कि इसी झुंझलाहट और बौखलाहट में उसने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर हमले किए, नहीं तो यूएई के ऊर्जा संसाधनों पर अभी हमले करने की कोई वजह नहीं थी। यूएस के नेवल ब्लॉकेड का जवाब उसने यूएई पर हमला कर दिया। यूएई ईरान का सबसे आसान शिकार बन गया है। युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरान खाड़ी देशों के तेल और गैस संयंत्रों को निशाना बना रहा है लेकिन यह अलग बात है कि ईरान पर हमला अमेरिका और इजराइल करते हैं और खामियाजा यूएई जैसे खाड़ी देशों को भुगतना पड़ता है। इजराइल ने ईरान के साउथ पार्स पर हमला किया लेकिन तेहरान ने कतर के रास लफान गैस फील्ड हमला कर दिया। रास लफान दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है। इसके अलावा उसने सऊदी अरब और बहरीन के ऊर्जा संयंत्रों पर हमले किए।

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