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2000 किलो के दर्जनों बम से किया हमला... बी-2 स्टील्थ बॉम्बर को क्यों कहते हैं अमेरिका का 'ब्रहास्त्र?'

Israel-Iran War: ​​​पेंटागन के अधिकारी ने बताया कि चार B-2 स्टील्थ बॉम्बर ने अमेरिका से ईरान तक नॉन-स्टॉप राउंड ट्रिप की थी और अंडरग्राउंड बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स पर दर्जनों 2 हजार वजनी बम गिराए थे। आइए काल की तरह दुश्मनों पर बरसने वाली बी‑2 बॉम्बर फाइटर जेट की खासियत को जान लें।

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अमेरिकी लड़ाकू विमान बी-2 बॉम्बर ने ईरान में मचाई तबाही।
Authored by: Piyush Kumar
Updated Mar 5, 2026, 16:38 IST

Israel-Iran War: इजरायल-ईरान युद्ध पर विराम कब लगेगा? इस सवाल का जवाब तो सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ही दे सकते हैं, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि सिर्फ चार दिनों के भीतर ही इस भीषण युद्ध में हजारों लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। मिडिल ईस्ट में हर तरफ मातम पसरा हुआ है। ईरान से लेकर इराक तक, लोग हर पल मौत और जिंदगी से लड़ने पर मजबूर हैं।

सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत अमेरिकी सेना ने जल, थल और नभ, तीनों दिशाओं से ईरान पर चौतरफा हमला बोला है। अमेरिका का एक ही उद्देश्य है कि चाहे कुछ भी हो ईरान के पास न्यूक्लियर बम न हो। वहीं, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अमेरिका पूरी तरह ध्वस्त करने में जुटा है।

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अमेरिका ने झोंक दी पूरी ताकत

अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए अमेरिका ने 50,000 से अधिक सैनिक, 200 से अधिक लड़ाकू विमान, दो एयरक्राफ्ट कैरियर (बड़े जहाज जो लड़ाकू विमान ले जाते हैं), और बी-1, बी-2, और बी-52 जैसे शक्तिशाली बॉम्बर विमान मैदान-ए-जंग में उतारा है। सबसे भीषण तबाही तो बी-2 स्टेल्थ बॉम्बर ने मचाई है।

पेंटागन के अधिकारी ने बताया कि चार B-2 स्टील्थ बॉम्बर ने अमेरिका से ईरान तक नॉन-स्टॉप राउंड ट्रिप की थी और अंडरग्राउंड बैलिस्टिक मिसाइल साइट्स पर दर्जनों 2 हजार वजनी बम गिराए थे। आइए काल की तरह दुश्मनों पर बरसने वाली बी‑2 बॉम्बर फाइटर जेट की खासियत को जान लें।

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कितना खतरनाक है बी‑2 बॉम्बर?

दुनिया के हर रडार से लगभग अदृश्य रहने की क्षमता, हजारों किलोमीटर दूर तक बिना रुके उड़ान, और सटीक हमला करने की ताकत रखने वाली इस फाइटर जेट ने पहली बार 1989 में उड़ान भरी और 1993 में पहली बार इसे सेवा में शामिल किया गया। यह फाइटर जेट बिना रुके न सिर्फ कोसों मील की दूरी तय कर लेती है, बल्कि टारगेट पर बड़ी सटीकता से बम बरसाती है।

यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर सीधे हाई‑वैल्यू टारगेट पर हमला करता है। जीपीएस‑गाइडेड बम और बंकर‑बस्टर जैसे हथियार गिराने की क्षमता रखने वाले ये विमान भूमिगत कमांड सेंटर, रनवे और हथियार डिपो को पूरी तरह नेस्तनाबूद करने के लिए जाना जाता है।

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कितना महंगा है बी‑2 बॉम्बर?

यह दुनिया का सबसे महंगा सैन्य विमान माना जाता है। एक बी‑2 बॉम्बर की औसत लागत करीब 2 अरब डॉलर से अधिक बताई जाती है। इसमें रिसर्च, स्टील्थ तकनीक, सॉफ्टवेयर और मेंटेनेंस का खर्च शामिल है। रक्षा सूत्रों की मानें तो दुनियाभर में कुल 21 बी‑2 बॉम्बर बनाए गए हैं। ज्यादातर अमेरिका के पास ही ये हथियार हैं।

बी‑2 बॉम्बर से जुड़ी जरूरी बातें

  • विमान का प्रकार: स्टील्थ स्ट्रैटेजिक बॉम्बर
  • इंजन: 4 × जनरल इलेक्ट्रिक F118-GE-100 टर्बोफैन इंजन
  • विंगस्पैन (पंखों की चौड़ाई): 52.12 मीटर
  • लंबाई: 20.9 मीटर
  • ऊंचाई: 5.1 मीटर
  • वजन: लगभग 72,575 किलोग्राम
  • हथियार क्षमता: पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के आयुध ले जाने में सक्षम
  • क्रू (चालक दल): 2 पायलट
  • रेंज (बिना ईंधन भरे): करीब 11,000 किलोमीटर
  • रेंज (एक बार हवा में ईंधन भरने के बाद): लगभग 18,500 किलोमीटर
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कब-कब हुआ बी-2 बॉम्बर का इस्तेमाल?

कोसोवो (1999): नाटो के ऑपरेशन Allied Force के दौरान बी-2 बॉम्बर ने पहली बार युद्ध में अपनी ताकत दिखाई। अमेरिका के मिसौरी से उड़ान भरकर इन विमानों ने सर्बियाई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए। हर मिशन 30 घंटे से ज्यादा लंबा रहा, जिसने इसकी लंबी दूरी की क्षमता साबित की।

अफगानिस्तान (2001–02): 9/11 के बाद शुरू हुए युद्ध में बी-2 ने तालिबान के बंकरों, ट्रेनिंग कैंपों और गुफाओं में छिपे ठिकानों को निशाना बनाया। हवा में ईंधन भरने की सुविधा के कारण ये विमान बिना रुके अमेरिका से सीधे अपने लक्ष्य तक पहुंचे।

इराक (2003): इराक युद्ध की शुरुआत में बी-2 बॉम्बर्स ने सद्दाम हुसैन से जुड़े कमांड सेंटरों और मिसाइल ठिकानों पर बंकर-रोधी बम गिराए। इन हमलों ने इराक की हवाई सुरक्षा और सैन्य नेतृत्व ढांचे को शुरुआती झटका दिया।

लीबिया (2011): नाटो के ऑपरेशन ओडिसी डॉन में बी-2 विमानों ने एयरफील्ड और एयरक्राफ्ट शेल्टर को निशाना बनाया। इन हमलों ने कुछ ही घंटों में नो-फ्लाई ज़ोन लागू करने का रास्ता साफ कर दिया और लीबिया की हवाई क्षमता कमजोर कर दी।

सीरिया (2017): मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पूर्वी सीरिया में ISIS के ठिकानों पर बी-2 बॉम्बर का इस्तेमाल किया गया। माना जाता है कि सुरक्षित और भूमिगत ठिकानों को तबाह करने के लिए GBU-57 जैसे बंकर बस्टर बम गिराए गए, हालांकि आधिकारिक पुष्टि सीमित रही।

यमन (2024): अमेरिका ने हूती विद्रोहियों के ठिकानों को निशाना बनाने के लिए बी-2 तैनात किए। पेंटागन ने इसे विमान की लंबी दूरी और सटीक हमले की क्षमता का “अद्वितीय प्रदर्शन” बताया।

ईरान (22 जून 2025): अमेरिका ने बी-2 बॉम्बर के जरिए फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु स्थलों पर हमला किया। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे बड़ी सैन्य सफलता बताया।

ईरान (2026): एक बार फिर बी-2 की तैनाती हुई। अमेरिकी विमानों ने 2000 पाउंड के कई बम गिराकर ईरान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।

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