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हमास ने सात बंधकों को किया रिहा, इजरायली सेना ने की पुष्टि; देख लें पूरी डिटेल

Israel vs Hamas: इजरायली सेना ने बताया है कि रेड क्रॉस ने उसके पास सात बंधक होने की पुष्टि की। 7 बंधकों को वर्तमान में IDF और ISA बलों के साथ इजरायली क्षेत्र में वापस भेजा जा रहा है, जहां उनका प्रारंभिक चिकित्सा मूल्यांकन किया जाएगा। आपको इससे जुड़ी पूरी डिलेट बताते हैं।

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रेड क्रॉस ने उसके पास सात बंधक होने की पुष्टि की।

Red Cross confirms for Seven Hostages: इजरायल की सेना ने बुधवार को कहा कि रेड क्रॉस ने हमास की ओर से सात बंधकों को उसके हवाले किए जाने की पुष्टि की है, जिनमें दो इजरायली और पांच थाई नागरिक शामिल हैं। इन बंधकों को गाजा पट्टी में युद्ध रोकने के लिए इजरायल और हमास के बीच हुए संघर्ष-विराम समझौते के तहत रिहा किया गया है। 19 जनवरी से प्रभावी संघर्ष-विराम से क्षेत्र में लड़ाई थमने के साथ ही मदद सामग्री की आपूर्ति बढ़ गई है।

33 इजरायली बंधकों को छोड़ा जाने पर हुआ है समझौता

संघर्ष-विराम समझौते के शुरुआती छह हफ्तों में लगभग 2,000 फलस्तीनी कैदियों की रिहाई के बदले कुल 33 इजरायली बंधकों को छोड़ा जाना है। इजरायल ने कहा है कि उसे हमास की ओर से सूचना मिली है कि आठ इजरायली बंधक या तो सात अक्टूबर 2023 के हमले में मारे गए थे या फिर उनकी हमास के कब्जे में मौत हो गई।

बंधकों का प्रारंभिक चिकित्सा मूल्यांकन किया जाएगा

इजरायली डिफेंस फोर्स ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि '7 बंधकों को वर्तमान में IDF और ISA बलों के साथ इजरायली क्षेत्र में वापस भेजा जा रहा है, जहां उनका प्रारंभिक चिकित्सा मूल्यांकन किया जाएगा। IDF बंधकों को सलाम करता है और उन्हें गले लगाता है, क्योंकि वे इजरायल राज्य में अपने घर जा रहे हैं।' 482 दिनों के बाद, वे घर पहुंच गए हैं।

रेड क्रॉस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, दो इजरायली और पांच विदेशी नागरिकों सहित सात बंधकों को उनके पास स्थानांतरित कर दिया गया है और वे गाजा में IDF और ISA बलों की ओर जा रहे हैं। 482 दिन पहले, इन थाई नागरिकों को हमास ने गाजा में अगवा कर लिया था। आज वे आखिरकार आज़ाद हो गए हैं।

रेड क्रॉस ने सात बंधकों को गाजा पट्टी में इजराइली बलों को सौंप दिया है। इससे पहले हमास ने इजराइली सैनिक ऐगम बर्जर को गाजा में ‘रेड क्रॉस’ के हवाले किया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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