सेहत पर असर डालता है चंद्र ग्रहण? जानें इसके प्रभाव

May 13, 2022

By: Bhagya Yadav

​क्या होता है चंद्र ग्रहण?

विज्ञान के अनुसार, चंद्र ग्रहण एक खगोलीय घटना है। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है तब इसकी छाया चंद्रमा की रोशनी को ढक लेती है। इस दौरान पृथ्वी के वायुमंडल से सूर्य की रोशनी टकराती है और चंद्रमा पर पड़ती है। जिसकी वजह से चांद और चमकीला दिखने लगता है।

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​वर्ष 2022 में चंद्र ग्रहण की तिथि

वर्ष 2022 में पहला चंद्र ग्रहण बुध पुर्णिमा के दिन लग रहा है। इस वर्ष 16 मई को चंद्र ग्रहण लगेगा।

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​चंद्र ग्रहण 2022 का समय

16 मई को वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण लगेगा। यह सुबह 8:59 से 10:23 तक लगने वाला है।

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​चंद्र ग्रहण का पड़ता है सेहत पर असर

पौराणिक धारणाओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण के दौरान निकलने वाली अल्ट्रावायलेट किरणें पके हुए खाने को नुकसान पहुंचाती हैं और पानी को दूषित करती हैं। इस दौरान लोगों को नंगी आंखों से ग्रहण ना देखने को कहा जाता है।

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​क्या कहते हैं वैज्ञानिक तथ्य?

एक शोध के अनुसार, चंद्र ग्रहण का असर इंसानों की नींद पर पड़ता है। इसके साथ यह भी पता चला था कि इंसान और जानवरों के बर्ताव और साइकोलॉजी पर भी चंद्र ग्रहण प्रभाव डालता है। चंद्र ग्रहण से ह्यूमन रिप्रोडक्शन, मासिक धर्म, बर्थ रेट और फर्टिलिटी पर भी असर पड़ता है।

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​हार्मोन को करता है नियंत्रित

कहा जाता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान महिलाओं के मासिक धर्म पर असर पड़ता है। चंद्र ग्रहण के दौरान महिलाओं में हार्मोनल चेंज होने की संभावना रहती है।

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​फर्टिलिटी पर पड़ता है असर

चंद्रमा को उर्वरता का प्रतीक माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, यह समय उन महिलाओं के लिए लाभदायक होता है जो गर्भवती होने के लिए ओवुलेशन में रहती हैं।

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आंखें भी होती हैं प्रभावित

चंद्र ग्रहण के दौरान लोगों को सनग्लासेज पहनने की सलाह दी जाती है। ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित नहीं माना गया है। यह आंखों की रोशनी के लिए हानिकारक साबित हो सकता है।

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​खाने को पहुंचाता है नुकसान

ऐसी मान्यता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान लोगों को किसी भी चीज का सेवन नहीं करना चाहिए। कहा जाता है चंद्र ग्रहण खाने को प्रभावित करता है।

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​पल्स रेट पर होता है असर

ऐसा कहा जाता है कि चांद की परिक्रमा हमारे शरीर को प्रभावित करती है। इससे हमारे पल्स रेट पर असर पड़ता है। लेकिन खगोलीय दृष्टि से हमारा शरीर सूक्ष्म है इसीलिए चांद की परिक्रमा से होने वाले बदलाव न्यून रहते हैं। जिन्हें हम महसूस भी नहीं कर पाते हैं।

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