जानें ब‍िरयानी की कहानी

By: मेधा चावला
Dec 21, 2020

कहां हुआ पहला ज‍िक्र

हिंदुस्तान में पहली बार बेरयान का जिक्र नुस्खा-ए-शाहजहानी में मिलता है, जिसमें 17वीं सदी के मुगल बादशाह शाहजहां के दौर की रेसिपी है।

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ईरान से आई

बिरयानी ईरान से आई है। इसका नाम फारसी शब्द 'बिरिंज बिरियान' से निकला है जिसका मतलब है भूना हुआ चावल।

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ईरान की शैली

ईरान में बिरयानी को देग यानी हांडी में दम यानी धीमी आंच पर पकाया जाता है। इसमें चावल परतों में रखे जाते हैं और मसालों का खासा प्रयोग होता है।

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बदला गया तरीका

एक र‍िपोर्ट के अनुसार ईरान में अब चावल की ब‍िरयानी की जगह रुमाली रोटी और मीट के कॉम्‍ब‍िनेशन ने ले ली है।

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भारत में ब‍िरयानी

ये पक्‍का नहीं है क‍ि मुगल ही ब‍िरयानी को भारत में लाए। लेक‍िन अब भारत में इसके साथ स्‍थानीय स्‍वाद जुड़ गए हैं।

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भोपाल की ब‍िरयानी

यहां की ब‍िरयानी को अफगानी स्‍वाद वाली माना जाता है जिसके तार अहमद शाह अब्दाली जुड़े हैं।

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दिल्‍ली की ब‍िरयानी

यहां म‍िलने वाली ब‍िरयानी का स्‍वाद मुरादाबादी है। वहीं हैदराबादी जायके के शौकीन भी खूब हैं।

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पॉपुलर स्‍ट्रीट फूड

रेस्‍तरां में ब‍िरयानी भले ही खास मेन्‍यू हो लेक‍िन ये स्‍ट्रीट फूड के तौर पर भी पहचान बना चुकी है।

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मगर अफसोस

हालांक‍ि अफसोस इस बात का है क‍ि ब‍िरयानी अब पारंपर‍िक स्‍वाद जैसी नहीं बन रही। इसे बस फ्राइंग पैन बिरयानी ही कहा जा सकता है।

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