Nov 06, 2025

न्यूक्लियर टेस्ट को आखिर छिपाया क्यों नहीं जा सकता? एक नहीं कई है वजह

Alok Rao

​​भूकंपीय तरंगें​

परमाणु विस्फोट से ज़मीन के भीतर शक्तिशाली झटके उत्पन्न होते हैं, जिन्हें दुनिया भर के सिस्मिक स्टेशन तुरंत पकड़ लेते हैं। (तस्वीर-Istock)

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​वैश्विक निगरानी नेटवर्क​

CTBTO जैसी एजेंसियों के पास 300 से ज़्यादा मॉनिटरिंग स्टेशन हैं जो परमाणु परीक्षण का पता लगाते हैं। (तस्वीर-Istock)

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​रेडियोधर्मी गैसों का उत्सर्जन​

विस्फोट के बाद वातावरण में निकलने वाली रेडियोधर्मी गैसें और कण विशेष उपकरणों से दूर से भी पकड़े जा सकते हैं। (तस्वीर-Istock)

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​​सैटेलाइट निगरानी​

आधुनिक उपग्रह तापीय, इंफ्रारेड और विजुअल सेंसर से किसी भी असामान्य गतिविधि या विस्फोट के निशान पकड़ सकते हैं। (तस्वीर-Istock)

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​भूगर्भीय विकृति​

भूमिगत विस्फोटों से धरती की सतह पर सूक्ष्म दरारें और भू-संरचना में बदलाव आते हैं, जो उपग्रह चित्रों से देखे जा सकते हैं। (तस्वीर-Istock)

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​​हवा और पानी के नमूने​

वैज्ञानिक टीमें हवा, मिट्टी और पानी के नमूने लेकर उनमें मौजूद रेडियोआइसोटोप की जांच करती हैं, जिससे परमाणु गतिविधि का पता चलता है। (तस्वीर-Istock)

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​​इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस​

देशों के पास ऐसी प्रणालियां होती हैं जो परमाणु परीक्षण के दौरान उत्पन्न इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल पकड़ लेती हैं। (तस्वीर-Istock)

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​​इनफ्रासाउंड सेंसर​

परमाणु विस्फोटों से उत्पन्न निम्न-आवृत्ति वाली ध्वनियाँ (जो मनुष्य नहीं सुन सकता) हज़ारों किलोमीटर दूर तक दर्ज की जा सकती हैं। (तस्वीर-Istock)

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​​अंतरराष्ट्रीय सहयोग​

जब कहीं असामान्य भूकंपीय गतिविधि होती है, तो कई देश तुरंत डेटा साझा करते हैं — जिससे परीक्षण छिपाना लगभग असंभव हो जाता है। (तस्वीर-Istock)

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