Dec 29, 2025
यूनिवर्स की सबसे महंगी चीज का नाम 'एंटीमैटर' यानी 'प्रति पदार्थ' है। इसके एक ग्राम की कीमत से दुनिया के कई छोटे देश खरीदे जा सकते हैं।
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एक ग्राम की अनुमानित कीमत 62.5 ट्रिलियन डॉलर प्रति ग्राम (लगभग 62.5 लाख करोड़ रुपये) तक बताई जाती है।
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वजह ये है कि इसे बनाना बेहद मुश्किल और ऊर्जा-गहन प्रक्रिया है, और इसे बनाने में विशाल संसाधनों की जरूरत होती है।
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इसे फिलहाल छोटे कणों में ही बनाना संभव है, और इसका कोई व्यावसायिक बाजार नहीं है, बल्कि यह वैज्ञानिक प्रयोगों का उप-उत्पाद है।
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वैज्ञानिकों ने एंटीमैटर के बारे में सबसे पहले अंतरिक्ष से जाना था। अंतरिक्ष में ब्लैक होल द्वारा तारों के दो हिस्सों में टूटने की घटना में एंटीमैटर पैदा होता है।
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इस पर रिसर्च की गई और इसकी असीमित ऊर्जा के बारे में जाना तो वैज्ञानिकों ने इसे इसे बनाने के बारे में सोचा।
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एंटीमैटर प्रतिकणों जैसे पाजीट्रॉन, प्रति-प्रोटान, प्रति-न्यूट्रॉन से मिलकर बनता है। धरती पर सबसे पहले इसे सर्न (CERN's) लैब में बनाया गया था।
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धरती पर इसे बनाने की प्रोसेस इतनी मुश्किल है कि अबतक 10 नैनोग्राम (0.000000001 ग्राम) से भी कम एंटीमैटर ही बन सका है।
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लैब में एक ग्राम एंटीमैटर बनाने के लिए करीब 25 मिलियन बिलियन किलोवॉट प्रति घंटे बिजली की जरूरत होती है।
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अगर एक ग्राम एंटीमैटर का रिएक्शन एक ग्राम एंटीमेटर से कराने पर इससे हिरोशिमा पर गिराए गए बम से तीन गुना ज्यादा ऊर्जा निकल सकती है।
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