Dec 12, 2024
दरअसल, हम जिस पक्षी की बात कर रहे हैं वह शुतुरमुर्ग की तरह दिखता है और उसे हम एमु (Emu) के नाम से जानते हैं।
Credit: iStock
एमु न सिर्फ तैरने में माहिर होते हैं, बल्कि लंबी-लंबी छलांग भी लगाते हैं, लेकिन पंख होने के बावजूद उड़ नहीं पाते हैं।
Credit: iStock
साल 1932 में पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में लगभग 20,000 एमु का एक झुंड पानी की तलाश भटक रहा था और देखते ही देखते वह किसानों के इलाकों में चले आए और गेहूं के खेतों के बाड़ों को नुकसान पहुंचा रहे थे।
Credit: iStock
बाड़े टूट जाने की वजह से खरगोश और अन्य जानवर खेतों में घुस जाते और फसल को नुकसान पहुंचा सकते थे। इसलिए किसानों ने एमु के खिलाफ एक युद्ध छेड़ने के लिए रॉयल ऑस्ट्रेलियन आर्टिलरी से मदद मांगी।
Credit: iStock
ऑस्ट्रेलिया ने 2 नवंबर को 7वीं हैवी बैटरी, रॉयल ऑस्ट्रेलियन आर्टिलरी को मशीन गन और 10,000 राउंड गोला-बारूद के साथ तैनात किया। उम्मीद थी कि सैनिक एमु को आसानी से मार देंगे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।
Credit: iStock
सैनिकों ने 50 एमु के एक झुंड को निशाना बनाया, लेकिन गोली चलते ही एमु तितर-बितर हो गए। हालांकि, दो दिन बाद हजार एमु के एक झुंड को निशाना बनाकर की गई गोलीबारी में दर्जनभर एमु को मार गिराया गया।
Credit: iStock
ट्रक पर लगी मशीन गन से जब एमु को निशाना बनाया गया तो वह इतनी रफ्तार से दौड़े की उबड़-खाबड़ इलाके में ट्रक भी उनका पीछा नहीं कर पाया। जिसके बाद प्रकाशित कई रिपोर्ट्स में तो एमु को मशीन गन से भी तेज बताया गया।
Credit: iStock
50 से 200 एमु को मारने में सैनिकों ने 2500 राउंड खर्च कर दिए जिसके बाद उन्हें वापस बुला लिया गया। कुछ दिन बाद जब सैनिक लौटे तो उन्होंने हजार से कम एमु को मारने में 10 हजार राउंड खर्च कर दिया।
Credit: iStock
इसके बाद दिसंबर में एमु के विरुद्ध युद्ध को समाप्त कर दिया गया और इस युद्ध को 'एमु' की जीत के तौर पर देखा जाता है।
Credit: iStock
इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स