ये है ब्रह्मांड की सबसे महंगी चीज, 1 ग्राम की कीमत 63 लाख अरब रुपये
Amit Mandal
एंटीमैटर सबसे महंगा
यूनिवर्स की सबसे महंगी चीज का नाम 'एंटीमैटर' यानी 'प्रति पदार्थ' है। इसके एक ग्राम की कीमत से दुनिया के कई छोटे देश खरीदे जा सकते हैं।
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एक ग्राम की कीमत 90 ट्रिलियन डॉलर
नासा के मुताबिक इसके एक ग्राम की कीमत करीब 90 ट्रिलियन डॉलर (करीब 63 लाख अरब रुपये) है।
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धरती पर नहीं मिलता
एंटीमैटर हमारे आसपास के वातावरण या धरती पर नहीं पाया जाता है, बल्कि इसे लैब तैयार किया जाता है और इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष से जुड़े कामों में होता है।
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अंतरिक्ष में मिलता है एंटीमैटर
वैज्ञानिकों ने एंटीमैटर के बारे में सबसे पहले अंतरिक्ष से जाना था। अंतरिक्ष में ब्लैक होल द्वारा तारों के दो हिस्सों में टूटने की घटना में एंटीमैटर पैदा होता है।
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इसमें असीमित ऊर्जा
इस पर रिसर्च की गई और इसकी असीमित ऊर्जा के बारे में जाना तो वैज्ञानिकों ने इसे इसे बनाने के बारे में सोचा।
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इन चीजों से बनता है एंटीमैटर
एंटीमैटर प्रतिकणों जैसे पाजीट्रॉन, प्रति-प्रोटान, प्रति-न्यूट्रॉन से मिलकर बनता है। धरती पर सबसे पहले इसे सर्न (CERN's) लैब में बनाया गया था।
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अबतक 10 नैनोग्राम एंटीमैटर ही बन पाया
धरती पर इसे बनाने की प्रोसेस इतनी मुश्किल है कि अबतक 10 नैनोग्राम (0.000000001 ग्राम) से भी कम एंटीमैटर ही बन सका है।
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असीमित बिजली की जरूरत
लैब में एक ग्राम एंटीमैटर बनाने के लिए करीब 25 मिलियन बिलियन किलोवॉट प्रति घंटे बिजली की जरूरत होती है।
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एंटीमैटर में इतनी ताकत
अगर एक ग्राम एंटीमैटर का रिएक्शन एक ग्राम एंटीमेटर से कराने पर इससे हिरोशिमा पर गिराए गए बम से तीन गुना ज्यादा ऊर्जा निकल सकती है।
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पॉल डिराक ने बताया था
एंटीमैटर के बारे में सबसे पहले ब्रिटिश भौतिकशास्त्री पॉल डिराक (Paul Dirac) ने बताया था। न्यू मैगजीन में उनकी थ्योरी छापी गई और उन्हें न्यूटन के बाद सबसे बड़ा वैज्ञानिक माना गया।
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किन कामों में इस्तेमाल
इसका इस्तेमाल कैंसर के इलाज में, रॉकेट फ्यूल के रूप में किया जा सकता है।
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