Jan 07, 2026
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान ग्रीनलैंड का नाम सुर्खियों में आया। साल 2019 में ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड खरीदने में रुचि रखता है। इस बयान ने पूरी दुनिया का ध्यान इस दूर-दराज द्वीप पर खींच लिया।
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ग्रीनलैंड आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जहाँ से अमेरिका, रूस और यूरोप की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है। यहां पहले से ही Thule Air Base मौजूद है, जो मिसाइल चेतावनी और अंतरिक्ष निगरानी के लिए अहम है।
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ग्रीनलैंड में तेल, गैस और रेयर अर्थ मिनरल्स जैसे कीमती खनिज मौजूद हैं। ट्रंप के ‘खरीदने’ वाले बयान पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने साफ इनकार किया था, लेकिन आर्कटिक की वैश्विक प्रतिस्पर्धा और प्राकृतिक संसाधनों की होड़ इसे लगातार चर्चा में रखती है।
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ग्रीनलैंड में तेल, गैस, सोना, यूरेनियम और रेयर अर्थ मिनरल्स मौजूद हैं। बर्फ पिघलने से खनन आसान हो रहा है और नए व्यापार मार्ग खुल रहे हैं। ये संसाधन मोबाइल, इलेक्ट्रिक कार, मिसाइल और हाई-टेक हथियारों में इस्तेमाल होते हैं।
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अमेरिका का Thule Air Base ग्रीनलैंड में पहले से मौजूद है। यह बेस रूस और चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बेहद अहम माना जाता है। यही कारण है कि ग्रीनलैंड अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
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जैसे-जैसे बर्फ पिघल रही है, खनन आसान हो रहा है और नए व्यापार मार्ग खुल रहे हैं। इससे ग्रीनलैंड की आर्थिक और रणनीतिक कीमत लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में यह द्वीप वैश्विक राजनीति और ताकत का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ पिघल रही है। इससे खनन आसान हो रहा है और आर्कटिक में नए व्यापारिक मार्ग खुल रहे हैं।
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2019 में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड खरीदने का असामान्य प्रस्ताव रखा था। यह बयान वैश्विक मीडिया में सुर्खियों में आया और ग्रीनलैंड की रणनीतिक अहमियत को सामने लाया।
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चीन ने खुद को ‘नियर आर्कटिक स्टेट’ घोषित किया है। वह आर्कटिक में पोलर सिल्क रोड और नए व्यापार मार्ग बनाकर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है। अमेरिका इसे अपने लिए सुरक्षा खतरा मानता है।
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