Apr 22, 2025
सदियों से ये सवाल परेशान करता है कि क्या हम ब्रह्मांड में अकेले हैं? लेकिन अब शायद इस सवाल का जवाब मिल जाए।
Credit: NASA/Wikimedia
एक भारतीय वैज्ञानिक की ऐतिहासिक खोज से ये संभव हो सकता है। इस भारतीय मूल के खगोलशास्त्री का नाम है डॉ. निक्कू मधुसूदन।
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खगोलशास्त्री डॉ. निक्कू मधुसूदन ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में अपनी टीम के साथ मिलकर जो रिसर्च की है उसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है।
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उन्होंने नासा के जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) की मदद से 120 प्रकाश वर्ष दूर स्थित ग्रह K2-18b में जीवन की मौजूदगी वाले कुछ चौंकाने वाले संकेत खोजे हैं।
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K2-18b नाम के इस ग्रह में जलमग्न वातावरण और हाइड्रोजन से भरपूर वायुमंडल हो सकता है जो जीवन की निशानी है।
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K2-18b के वायुमंडल में वैज्ञानिकों को डाइमिथाइल सल्फाइड (DMS) और डाइमिथाइल डाइसल्फाइड (DMDS) जैसे केमिकल एलिमेंट्स मिले हैं।
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ये कैमिकल आमतौर पर पृथ्वी पर केवल जीवित जीवों, जैसे फाइटोप्लांकटन और बैक्टीरिया, द्वारा उत्पन्न किए जाते हैं।
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प्रोफेसर निक्कू मधुसूदन का मानना है कि अगले एक या दो सालों में यह साबित किया जा सकेगा कि K2-18b पर जीवन की मौजूदगी संभव है।
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एक भारतीय वैज्ञानिक द्वारा की गई यह खोज विज्ञान की दुनिया में क्रांति तो ला ही सकती है, यह भारत के लिए भी गर्व का विषय होगा।
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