Dec 26, 2024
इतिहासकारों द्वारा भारत को अक्सर "आक्रमणकारियों का स्वर्ग" कहा जाता है। सभ्यता की शुरुआत से ही भारत पर कई विदेशी आक्रमण हुए।
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सदियों से भारत की संपदा और समृद्धि विदेशियों को आकर्षित करती थी, भारत हर तरह से संपन्न था। जमीन उपजाऊ थी और यहां कृषि की अपार संभावनाएं थीं।
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विदेशी शासक भारत को अपना गुलाम बनाकर कच्चा माल पाने के लिए उपनिवेश के रूप में इस्तेमाल करना चाहते थे।
विदेशी शासकों का मुख्य उद्देश्य भारत के पास मौजूद धन-संपत्ति को हासिल करना था। खासकर मुस्लिम हमलावरों की नजर मंदिरों में रखे अकूत खजाने परहोती थी।
भारत की अपार संपदा, कृषि क्षमता, मसाला व्यापार और उपजाऊ नदी घाटियों ने आक्रमणकारियों को हमले के लिए आकर्षित किया।
इसके अलावा देश के भीतर अस्थिरता ने भी आक्रमणकारियों को भारत पर हमला करने में भूमिका निभाई।
महमूद गजनवी ने 1001 से 1026 ईस्वी के बीच भारत पर 17 बार आक्रमण किया था. उनका मकसद भारत से धन और संपदा लूटना था।
बाबर ने भारत पर पहला आक्रमण 1519 ईं में बाजौर पर किया था। यहीं से मुगल शासन की नींव पड़ी थी।
अगर हम देशों की बात करें तो पहले यूरोपीय हमलावर पुर्तगाली थे, उसके बाद डच, ब्रिटिश, डेनिश और अंत में फ्रांसीसी आए।
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