Aug 22, 2023
Chandrayan-3 की दूरी अब चांद से महज 30 किमी रह गई है। इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों ने भारत का तिरंगा चांद तक पहुंचाने के लिए काफी मेहनत भी की है।
Credit: Social Media/Istock
चांद पर चंद्रयान की सुरक्षित लैंडिंग को लेकर कहा जा रहा है कि 23 अगस्त को विक्रम लैंडर उतर सकता है।
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इसरो (ISRO) ने चंद्रयान-3 की लैंडिंग देखने के लिए पूरी व्यवस्था कर ली है। इसका लाइव टेलीकास्ट आप यहां (https://www.youtube.com/watch?v=DLA_64yz8Ss) देख सकते हैं।
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सोशल मीडिया पर चंदा मामा को लेकर देशवासियों ने टिप्पणी करना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है चंदा मामा अब दूर के नहीं गए हैं।
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भारत की हर मां अपने बच्चे को 'चंदा मामा दूर के..' ये लोरी जरूर सुनाती है। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि आखिर चंदा यानी चांदा को मामा ही क्यों कहते हैं, इसे जीजा या फूफा भी तो कहा जा सकता था ?
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हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक, समुद्र मंथन के दौरान सागर से मां लक्ष्मी समेत जो तत्व बाहर आए उनमें ही चन्द्रमा भी शामिल थे और वे सभी तत्व माता मां लक्ष्मी के अनुज (छोटे भाई) माने गए। इस हिसाब से चंद्रमा माता लक्ष्मी के भाई हुए और उन्हें मामा कहा जाना लगा।
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भारत में धरती (पृथ्वी) को भी मां का दर्जा दिया गया है। चंद्रमा एक भाई के समान पृथ्वी की रक्षा करता है और उसके चक्कर लगाता है। इस हिसाब से भी चांद को मामा कहा जाता है।
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चांद को मामा कहने का रहस्य हमने आपको चंद्रयान की लैंडिंग से पहले ही दे दिया है। अब अगर आपसे ये सवाल सोशल मीडिया पर किसी ने पूछा तो भी आप आराम से बता पांएगे।
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चांद को मामा कहने की ये वजह हिन्दू मान्यताओं, किंवदंतियों, कहावतों और लोकोत्तियों पर आधारित है। ये फैक्ट्स सूचना-जानकारी मात्र के लिए हैं।
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