ट्रेन के डिब्‍बों पर लिखे नंबरों का क्‍या है मतलब, जानकर चौंक जाएंगे

Shaswat Gupta

Mar 21, 2024

​​ट्रेन के सफर में सवाल​​



ट्रेन में यात्रा के दौरान मन में बहुत से ऐसे सवाल आते हैं जिनका जवाब हम सभी में से काफी कम लोगों को पता होते हैं। जिनमें से एक सवाल और उसके जवाब के बारे में आज हम आपको बताएंगे।

Credit: Social Media/Istock

​​5 अंकों के नंबर का मतलब​​



क्‍या आपको मालूम है कि, ट्रेन के हर कोच पर पांच अंकों का ये नंबर क्‍यों लिखा जाता है और इसका क्‍या मतलब होता है ? अगर आप इस सवाल का जवाब नहीं जानते हैं तो आज हम आपको इसका जवाब दे देते हैं।

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​​चौंका देगी वजह​​



पांच अंकों का ये नंबर ट्रेन के हर कोच पर लिखा होता है, लेकिन इसे लिखने की वजह इतनी अनोखी है कि इसे जानने के बाद जरूर चौंक जाएंगे।

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​​शुरुआत के नंबरों का मतलब​​

दरअसल, पांच अंकों के नंबर में शुरुआत के दो नंबरों से पता चलता है कि ट्रेन का कोच किस साल में बनाया गया था। जैसे किसी ट्र्रेन के कोच पर अगर- 98322 लिखा है तो इसका मतलब कि ये कोच 1998 में बना है। अगर 07322 लिखा है तो वो कोच 2007 में बना है।

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​​तीन अंक अब भी बचे​​



पांच अंकों के नंबर में शुरुआत के दो नंबर के बारे में तो आप जान गए लेकिन अब भी तीन अंक बचे हैं। अब इन तीन नंबरों के बारे में भी हम आपको बता देते हैं।

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​​तीन नंबरों का भी मतलब​​


ट्रेन के कोच के नंबर में आखिरी के तीन नंबर कोच की श्रेणी बताते हैं कि ये कोच एसी 1 टियर है या 2 टियर या फिर सामान्य द्वितीय श्रेणी का है।

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​​ऐसे समझें​​



जैसे 98322 में 98 का मतलब कोच 1998 में बना है और 322 का मतलब हुआ कि, ये द्वितीय श्रेणी स्लीपर कोच है। ट्रेन के कोच पर ये नंबर डिब्‍बे के निर्माण और श्रेणी की तस्‍दीक करते हैं।

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​हर डिब्‍बे के लिए कोड​



रेलवे ने हर श्रेणी के डिब्‍बे के लिए अलग-अलग नंबरों के कोड बनाए हैं। जैसे- 001-025 (AC फर्स्‍ट क्‍लास), 151-200 (चेयर कार), 201-400 (स्‍लीपर सेकंड क्‍लास) और 701-800 (सामान ढुलाई के लिए लगने वाला कोच)

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​​ये भी हैं​​


रेलवे ने कोच की पहचान के लिए और भी कोड बनाए हैं। जैसे- 026-050 (Composite AC+ AC-2 टियर), 051-100 (AC -2 टियर), 401-600 – (जनरल द्वितीय श्रेणी) और 801(पैंट्री कार, वीपीयू,मेल कोच, जनरेटर कार आदि)।

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