Nov 30, 2023
जो लोग खाने के शौकीन हैं, उन्होंने टुंडे कबाब का नाम जरूर सुना होगा। कईयों ने तो इसका स्वाद भी चखा होगा। हालांकि, आज के समय में टुंडे कबाब का नाम काफी फेमस हो चुका है। लेकिन, कभी सोचा है इसका नाम कैसे पड़ा?
Credit: social media
ये तो हम सब जानते हैं टुंडे कबाब की शुरुआत लखनऊ से हुई है। अपने अनोखे स्वाद के लिए टुंडे कबाब पूरी दुनिया में मशहूर है।
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लेकिन, बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि इसका नाम कैसे पड़ा?
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हो सकता है आप में से कुछ लोग इसके बारे में जानते होंगे।
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अगर आप भी इसके बारे में नहीं जानते हैं, तो आज जरूर जान लीजिए।
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लखनऊ में इस कबाब की शुरुआत 1905 में बिना दांतों वाले नवाब के लिए हुई थी। हाजी मुराद अली नाम के शख्स ने अकबरी गेट के पास सबसे पहले एक छोटी दुकान से दिलकश कबाब का सफर शुरू किया था।
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हाजी मुराद अली को पतंग उड़ाने का काफी शौक था। एक दिन पतंग उड़ाने के दौरान हाथ में चोट लग गई और कुछ समय बाद उन्हें अपना हाथ कटवाना पड़ा।
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हाथ कट जाने के बावजूद हाजी मुराद अपनी दुकान पर बैठते रहे। लोग उन्हें टुंडा कहकर पुकारने लगे।
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टुंडे का अर्थ होता है एक हाथ ना होना। यहीं से टुंडे कबाब को नई पहचान मिली और टुंडे कबाब पूरी दुनिया में मशहूर हो गया।
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