Sep 02, 2026

कभी सोचा है समुद्र की कितनी गहराई तक जा सकता है इंसान, सच चौंका देगा

Kaushlendra Pathak

​रहस्यमयी दुनिया​

ये तो हम सब जानते हैं कि यह दुनिया रहस्यों से भरी हुई है। यहां कई ऐसी चीजें हैं, जिनके बारे में जानकर लोगों को यकीन करना मुश्किल हो जाता है। इसी कड़ी में हम आपको समुद्र के बारे में ऐसी जानकारी देंगे, जिसके बारे में शायद ही आप जानते होंगे।

Credit: istock

​130 फीट तक सुरक्षित​

बिना किसी सुरक्षा उपकरण या दबाव-रोधी तकनीक के एक सामान्य गोताखोर समुद्र के अंदर अधिकतम 40 मीटर यानी 130 फीट तक ही सुरक्षित जा सकता है। इससे नीचे जाने पर फेफड़ों पर दबाव जानलेवा होने लगता है।

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​गहरी डाइव का रिकॉर्ड​

इंसानी इतिहास में बिना सबमर्सिबल के सबसे गहरी डाइव का रिकॉर्ड 332 मीटर अहमद गबर के नाम है। दरअसल, 200 मीटर की गहराई तक पहुंचते-पहुंचते सूरज की 99 प्रतिशत रोशनी खत्म हो जाती है। इसे 'ट्विलाइट जोन' कहा जाता है। यहां केवल हल्की सी नीली-हरी रोशनी बचती है।

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​जीरो प्रतिशत लाइट​

वहीं, एक हजार मीटर के नीचे पूरी तरह से 0 प्रतिशत लाइट होती है। इसे मिडनाइट जोन कहा जाता है। यहां रोशनी का एकमात्र जरिया वे जीव हैं जो खुद अपने शरीर से बायो-ल्यूमिनेसेंस यानी रासायनिक रोशनी पैदा करते हैं। इसमें खतरनाक एंगलरफिश और जाइंट स्क्विड शामिल हैं।

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​​3,800 मीटर की गहराई​​

वहीं, 3,800 मीटर की गहराई में पानी का दबाव सतह की तुलना में 380 गुना ज्यादा होता है। यहां एक छोटी सी तकनीकी चूक पनडुब्बी को पलक झपकते ही पिचक कर तबाही का शिकार बना सकती है।

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​चार से छह हजार मीटर की गहराई​

वहीं, 4 से 6 हजार मीटर की गहराई को एबिसल जोन कहा जाता है। एबिस का मतलब होता है बिना पेंदे का गड्ढा। यह दुनिया का सबसे शांत, ठंडा और अत्यधिक दबाव वाला क्षेत्र है। यहां सूर्य का नामोनिशान नहीं होता

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​6 हजार मीटर से ज्यादा गहराई वाला क्षेत्र​

6 हजार मीटर से ज्यादा गहराई वाले क्षेत्र को हैडल जोन कहा जाता है। ग्रीक देव 'हैड्स' के नाम पर रखा गया यह क्षेत्र समुद्र की सबसे गहरी खाइयों में पाया जाता है। यहां लगता है कि जीवन नामुमकिन है, लेकिन, वहां भी 'हैडल स्नेलफिश' जैसी पारदर्शी मछलियां तैरती मिलती हैं।

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​10 हजार से ज्यादा मीटर गहराई वाला एरिया​

10,927 मीटर की गहराई को चैलेंजर डीप कहा जाता है। मारियाना ट्रेंच में स्थित 'चैलेंजर डीप' पृथ्वी की सबसे गहरी जगह है। यहां पानी का दबाव इंसान के ऊपर 1,071 वातावरण दबाव के बराबर होता है। अगर माउंट एवरेस्ट को भी इसमें डाल दें, तो भी उसकी चोटी 2 किमी पानी के अंदर डूबी रहेगी।

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​एक सच ये भी...​

इसके आगे पाताल ही माना जाता है। इंसान ने विशेष टाइटेनियम पनडुब्बियों से इस पाताल को भी छुआ है। यहां आपको बता दें कि 80% से ज्यादा महासागर आज भी अनखोजे हैं।


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