Dec 18, 2025
आप में से ज्यादातर लोगों ने आसमान में टूटते हुए तारे को देखा होगा।
Credit: istock
किस्से-कहानियों में भी तारे के टूटने की बात बताई जाती है।
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कई लोग तो टूटते हुए तारे को देखकर कोई ना कोई इच्छा जरूर मांगी होगी।
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लेकिन, क्या आप जानते हैं जिसे आप टूटते हुए तारे समझते हैं वास्तव में ऐसा नहीं है।
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दरअसल, हम आप जिसे टूटते हुए तारा कहते हैं, वो असल में एक उल्का पिंड है।
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उल्कापिंड अंतरिक्ष में तैरता हुआ चट्टान या फिर धातु का एक टुकड़ा होता है।
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उल्कापिंड पृथ्वी के वायुमंडल में काफी तेजी से आते हैं।
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उल्कापिंड की रफ्तार 40,000 से 70,000 किलोमीटर प्रति घंटे तक होती है।
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उल्का पिंड हमारे ग्रह के वायुमंडल के अंदर आते हैं। इसी कारण वे चमकदार रोशनी की लकीरें बनती हैं।
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