Nov 01, 2026
धरती पर लोहे में जंग लगते ते आपनो देखा ही होगा लेकिन क्या कभी यह सोचा है कि चांद पर लोहे में जंग लग सकता है या नहीं?
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आपमें से बहुत लोग कहेंगे कि चांद पर जब हवा और पानी है ही नहीं तो लोहे में जंग कैसे लग सकता है?
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मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि चांद पर लोहे में जंग लग सकता है और वह कैसे उसके पीछे का कारण आज जान लें।
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भारत द्वारा भेजे गए चंद्रयान-1 के आंकड़ों से यह पता चला है कि चांद की सतह पर हेमेटाइट मौजूद है, जो लोहे में लगे जंग का ही एक रूप है।
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अब बताते हैं कि कैसे जंग लग सकता है? दरअसल, चांद पर खुद का ऑक्सीजन और पानी नहीं है। मगर वहां मौजूद पानी के अंश और धरती से बहती हवा का वहां पहुंचना इसकी वजह हो सकते हैं।
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बता दें कि हर महीने 5 दिनों के लिए पृथ्वी के वायुमंडल से निकलने वाली ऑक्सीजन हवा के जरिए चांद के ध्रुवों तक पहुंचती है। जिसे अर्थ विंड कहते हैं।
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चांद की मिट्टी और चट्टानों में पानी के अंश मौजूद हैं और अंतरिक्ष से जब छोटे उल्कापिंड चांद की सतह से टकराते हैं, तो उनकी गर्मी से वहां छिपी नमी और हाइड्रोजन-ऑक्सीजन की प्रतिक्रिया से जंग बनती है।
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यह सब मिलकर चांद पर मौजूद आयरन-युक्त चट्टानों को ऑक्सीकृत (oxidize) कर देता है, जिससे वहां जंग दिखाई देती है। जिसे हेमेटाइट कहा जाता है।
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इस तरह से चांद पर जंग लग सकता है और इस पूरी प्रक्रिया के लिए पृथ्वी काफी हद तक जिम्मेदार है और अगर चांद पर लोहा छोड़ दिया जाए तो उसमें जंग जरूर लग जाएगा।
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