Oct 17, 2026

क्या बृहस्पति ग्रह पर उतर सकता है इंसान? जवाब जानकर चौंक जाएंगे आप

Pankaj Yadav

​क्या बृहस्पति ग्रह पर उतर सकते हैं या नहीं?​

धरती के अलावा इंसान अंतरिक्ष में भी पहुंच चुका है। चांद पर तो अब तक कई लोगों ने कदम भी रखे हैं ऐसे में क्या आपने यह सोचा है कि क्या इंसान बृहस्पति ग्रह पर उतर सकता है या नहीं?

Credit: iStock/NASA Science

​क्या आपने कभी यह सोचा?​

अगर कभी आपने यह सोचा भी हो तो क्या आपको इसका जवाब पता है? अगर नहीं पता तो चलिए आज हम आपको इसी बारे में बताते हैं कि क्या कोई इंसान बृहस्पति ग्रह पर उतर सकता है या नहीं?

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​हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह​

ये तो आप सबको पता है कि बृहस्पति ग्रह हमारे सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है। इसे दूर से देखने पर लगता है कि इसकी रंगीन सतह पर कोई अंतरिक्ष यान उतर सकता है।

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​क्या है सही जवाब और क्या है इसकी वजह?​

मगर आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यहां पर कोई इंसान कभी नहीं उतर सकता और इसका कारण ये है कि असल में यहां पर उतरना संभव ही नहीं है क्योंकि इस ग्रह पर कोई ठोस जमीन की सतह है ही नहीं।

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​गैसों से बना है यह ग्रह​

बता दें कि पृथ्वी की तरह बृहस्पति ग्रह पर कोई ठोस जमीन नहीं है। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम गैसों से बना है इसलिए इसे गैस जायंट कहा जाता है।

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​नीचे उतरते ही ही बढ़ती जाती है मुश्किलें​

अगर कोई यान बृहस्पति के बादलों के अंदर जाने लगे, तो उसे ठोस जमीन नहीं मिलेगी। वह गैसों की अलग-अलग परतों में आगे बढ़ेगा। गहराई बढ़ने के साथ दबाव और तापमान भी बढ़ते जाएंगे।

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​यहां आते हैं विशाल तूफान​

बृहस्पति पर ग्रेट रेड स्पॉट नाम का विशाल तूफान है। यह इतना बड़ा है कि इसका आकार पृथ्वी से भी बड़ा है। यहां तेज हवाएं और तूफानी मौसम किसी भी अंतरिक्ष यान के लिए बहुत बड़ी चुनौती है।

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​दबाव बना सकता है यान को चकनाचूर​

बृहस्पति के अंदर गहराई तक जाने पर दबाव बहुत ज्यादा हो जाता है। इतना कि कोई सामान्य अंतरिक्ष यान इसे सहन नहीं कर सकता। ज्यादा गहराई पर यान टूटकर चकनाचूर भी हो सकता है।

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​तापमान भी बनता है दुश्मन​

बृहस्पति के अंदर जाते-जाते तापमान भी बेहद बढ़ जाता है। तेज गर्मी और भारी दबाव मिलकर अंतरिक्ष यान के उपकरणों को खराब कर सकते हैं। इंसान के लिए वहां जीवित रहना बेहद मुश्किल है।

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​वैज्ञानिकों ने भेजा था यान​

साल 1995 में नासा के गैलीलियो मिशन का एक खास प्रोब बृहस्पति के वायुमंडल में उतारा गया था। जहां से उसने उस ग्रह के वातावरण से जुड़ी अहम जानकारियां भेजीं थी।

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​सिर्फ 58 मिनट तक मिला डेटा​

गैलीलियो प्रोब ने बृहस्पति के वातावरण में उतरते हुए करीब 58 मिनट तक उपयोगी डेटा भेजा। इसके बाद उसका सिग्नल बंद हो गया।

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​फिर कहां उतर सकते हैं?​

बृहस्पति की कुछ चंद्रमाओं पर ठोस सतह है। जैसे यूरोपा पर बर्फ की मोटी परत है। वैज्ञानिक इन चंद्रमाओं का अध्ययन करते हैं, क्योंकि इनके नीचे पानी का महासागर होने की संभावना है।

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