Aug 30, 2026

पैकिंग में काम आने वाली यह बुलबुले वाली प्लास्टिक पहले किस काम के लिए बनी थी

Pankaj Yadav

​बबल रैप का पहले किस काम के लिए बना था?​

आज बबल रैप का इस्तेमाल सामान को टूटने से बचाने के लिए होता है लेकिन क्या आप जानते हैं, इसे शुरुआत में पैकिंग के लिए बनाया ही नहीं गया था?

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​बबल रैप बनाया जाना था वॉलपेपर​

1957 में इंजीनियर अल्फ्रेड फील्डिंग और मार्क चावनेस ने बबल रैप जैसा मटेरियल बनाया था। उनका मकसद इसे एक नए तरह के टेक्सचर वाले वॉलपेपर के रूप में इस्तेमाल करना था।

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​लेकिन आइडिया नहीं चला​

उन्होंने प्लास्टिक की दो परतों के बीच हवा के छोटे-छोटे बुलबुले बनाए लेकिन लोगों को यह वॉलपेपर का आइडिया खास पसंद नहीं आया।

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​फिर आया ग्रीनहाउस का आइडिया​

वॉलपेपर के बाद इस मटेरियल को ग्रीनहाउस में इस्तेमाल करने की कोशिश हुई। उम्मीद थी कि यह पौधों को गर्म रखने में मदद करेगा।

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​दूसरी कोशिश भी नहीं चली​

ग्रीनहाउस वाला आइडिया भी ज्यादा सफल नहीं हुआ लेकिन इस अजीब से दिखने वाले मटेरियल में एक खासियत जरूर थी।

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​बुलबुले बने इसकी ताकत​

हवा से भरे छोटे बुलबुले झटके को कम कर सकते थे। यही खासियत बाद में इसकी सबसे बड़ी पहचान बन गई।

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​फिर पैकिंग में आया काम​

1960 के दशक में कंपनियों ने समझा कि बबल रैप नाजुक सामान को सुरक्षित रखने के लिए शानदार है। इसके बाद इसका इस्तेमाल पैकिंग में तेजी से बढ़ा।

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​कांच से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक​

आज बबल रैप का इस्तेमाल कांच, इलेक्ट्रॉनिक सामान और दूसरी नाजुक चीजों की पैकिंग में होता है। इसके बुलबुले सामान को झटकों से बचाने में मदद करते हैं।

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​बन गया टाइमपास का सामान​

बबल रैप सिर्फ पैकिंग तक सीमित नहीं रहा। इसके बुलबुले फोड़ना भी लोगों का मजेदार टाइमपास बन गया।

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