Apr 02, 2026
अक्सर हम देखते हैं कि घड़ी की सुइयां दाईं ओर कि ओर घूमती हैं लेकिन ऐसा क्यों? इसके बारे में कभी नहीं सोचा
Credit: canva
दरअसल समय को मापने की शुरुआत लगभग 3500 ईसा पूर्व में संडायल (धूप घड़ी) से हुई, जिसमें छाया के आधार पर समय जाना जाता था।
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इसमें एक खड़ी छड़ी होती थी, जिसकी छाया जमीन पर पड़ती थी और सूरज की दिशा के साथ बदलती रहती थी।
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उत्तरी गोलार्ध में सूरज पूर्व (बाएं) से पश्चिम (दाएं) की ओर चलता हुआ दिखाई देता है, जिससे छाया भी उसी दिशा में घूमती है।
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संडायल की छाया जिस दिशा में घूमती थी, उसी को आधार बनाकर घड़ी की सुइयों की दिशा तय की गई, जिसे आज क्लॉकवाइज कहते हैं।
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14वीं सदी में जब मैकेनिकल घड़ियां बनीं, तो उनकी सुइयां भी संडायल की दिशा यानी बाएं से दाएं ही बनाई गईं।
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घड़ी का आविष्कार यूरोप (उत्तरी गोलार्ध) में हुआ, इसलिए वहां के सूरज के मूवमेंट के अनुसार सुइयों की दिशा तय हुई।
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कुछ संस्कृतियों, जैसे अरबी और हिब्रू में, जहां लिखावट दाएं से बाएं होती है, वहां एंटी-क्लॉकवाइज घड़ियां भी देखने को मिलती हैं।
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