Jan 06, 2026
बढ़ती ठंड और पाले के कारण आलू की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे किसान चिंतित हैं।
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जब तापमान शून्य डिग्री या उससे नीचे चला जाता है, तो पौधे की नसों में मौजूद पानी जम जाता है।
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पानी जमने से नसें काली हो जाती हैं और पौधा पूरी तरह मुरझाने लगता है।
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रोग लगने पर आलू की पत्तियां मुरझाकर गिर जाती हैं, जिससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है।
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ज्यादा ओस पड़ने से आलू के तने ठीक से विकसित नहीं हो पाते और पौधे बौने रह जाते हैं।
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पाला गिरने पर आर्द्रता 90 प्रतिशत तक हो जाती है, जिससे फसल को अधिक नुकसान होता है।
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ठंड के कारण पौधे कमजोर हो जाते हैं और कंद का विकास प्रभावित होने से पैदावार घटती है।
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पाले और ठंड से बचाव के लिए समय पर हल्की सिंचाई करना सबसे जरूरी और प्रभावी उपाय है।
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200 ग्राम 80% WP दवा को 100 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। 500 ग्राम थायो यूरिया को 1000 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। (डिस्क्लेमर: यह जानकारी इंटरनेट पर मिली जानकारी पर आधारित है, अगर आपको किसी दवा का इस्तेमाल करना है तो कृषि एक्सपर्ट से संपर्क करें।)
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अधिक ठंड से सरसों की फसल भी प्रभावित होती है, खासकर जब 75% फसल में फलियां आ चुकी हों, तो दाने पर असर पड़ता है।
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