Jul 12, 2025
अगर घर का सालाना किराया उसकी कीमत के 4% से ज्यादा है, तो घर खरीदना बेहतर है। अगर किराया 4% से कम है, तो किराये पर रहना समझदारी है।
Credit: istock
30% रूल कहता है कि आपकी मासिक आय का अधिकतम 30% ही हाउसिंग खर्च (किराया या EMI) पर जाना चाहिए ताकि बाकी जरूरी खर्च और सेविंग संतुलित रहें। ऐसे में यदि आपकी घर की EMI इससे कम है तो आप घर खरीद सकते हैं।
Credit: istock
अगर आपकी EMI मौजूदा किराए से 30%-40% ज्यादा है और आपकी इनकम पर भारी असर डालती है, तो किराये पर रहना फिलहाल बेहतर रहेगा।
Credit: istock
अगर आपके पास 20%-25% डाउन पेमेंट और रजिस्ट्रेशन शुल्क के लिए सेविंग्स नहीं है, तो घर की खरीदारी टालना ही समझदारी होगी।
Credit: istock
अगर आपकी नौकरी या बिजनेस लोकेशन बार-बार बदलती है, तो किराये पर रहना बेहतर है। स्थायी लोकेशन पर ही घर खरीदने का सोचें।
Credit: istock
अगर घर खरीदने से आपके दूसरे फाइनेंशियल गोल्स जैसे बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट फंड आदि प्रभावित हो रहे हैं, तो किराए का घर ज्यादा समझदारी है।
Credit: istock
अगर जिस इलाके में आप घर खरीदने का सोच रहे हैं वहां प्रॉपर्टी के रेट्स स्थिर या गिर रहे हैं, तो इंतजार करना बेहतर होगा।
Credit: istock
घर खरीदने पर मेंटेनेंस, सोसाइटी चार्ज, प्रॉपर्टी टैक्स जैसे खर्चे भी जुड़ते हैं। किराए में ये झंझट कम होते हैं।
Credit: istock
होम लोन लेने पर आपको सेक्शन 80C और 24(b) के तहत टैक्स में राहत मिलती है। अगर आप ज्यादा टैक्स दे रहे हैं, तो घर खरीदना फायदेमंद सौदा हो सकता है।
Credit: istock
अगर आपके लिए अपने घर का सपना और मन की डिजाइनिंग जरूरी है, तो खरीदना बेहतर है। लेकिन अगर फ्लेक्सिबिलिटी प्राथमिकता है, तो किराए का घर अच्छा रहेगा।
Credit: istock
इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स