Dec 25, 2025
हिंदी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार के गया जिले के वजीरगंज क्षेत्र के बिशुनपुर गांव के किसान नीति रंजन प्रताप ने चने की एक खास किस्म विकसित की है, जो खेती में नया उदाहरण बन गई है।
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इस चने की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। यह फसल ओस की नमी से भी उग सकती है, जो सूखे इलाकों के लिए बहुत फायदेमंद है।
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यह चना खास तौर पर सूखे और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए तैयार किया गया है। वहां इसका सफल ट्रायल भी किया गया है।
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भारत सरकार के पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण ने इस बीज को पंजीकृत कर लिया है और इसका नाम “नीति चना” रखा गया है।
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हिंदी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक अगर कोई इस बीज को बेचेगा, तो उसे नीति रंजन प्रताप को रॉयल्टी देनी होगी। इससे किसान को उनके इनोवेशन का सीधा लाभ मिलेगा।
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चना भारत की प्रमुख दलहनी फसलों में से एक है और यह रबी मौसम की अहम फसल मानी जाती है।
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यह बीज पूरी तरह स्वदेशी है। करीब 50 साल पहले उनके परिवार द्वारा उगाया जाता था, लेकिन 1980 के बाद यह किस्म लगभग खत्म हो गई थी।
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इस चने की पैदावार दूसरी किस्मों से बेहतर है। इसमें कीड़े और बीमारियां कम लगती हैं, जिससे किसानों की लागत भी घटती है।
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नीति चना खाने में स्वादिष्ट है और पोषण से भरपूर भी है, इसलिए यह सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है।
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हिंदी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक नीति रंजन चाहते हैं कि नीति चना को बिहार का ब्रांड बनाया जाए। अगर सरकार इसे किसानों तक पहुंचाए, तो इससे खेती में बदलाव आएगा और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।
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