भगवान शिव ने दशानन को क्यों दिया रावण नाम, जानें इसका अर्थ
लवीना शर्मा
रावण के अनेक नाम
रावण को दशानन, लंकापति, लंकेश इत्यादि नामों से जाना जाता है। लेकिन इनमें सबसे प्रसिद्ध है उनका रावण नाम।
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भगवान शिव का परम भक्त था रावण
एक बार रावण भगवान शिव की अराधना कर रहा था। भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए उसने अपना सिर काटकर भगवान शिव को अर्पित कर दिया। रावण की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव जी ने उसे दशानन होने का वरदान दिया।
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भगवान शिव को कैलाश से लंका लाना चाहता था रावण
रावण भगवान शिव का बड़ा भक्त था। वो शिवजी को कैलाश से लंका ले जाना चाहता था। लेकिन शिवजी तप में मगन थे।
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रावण ने कैलाश पर्वत को ही उठा लिया
भगवान शिव को लंका ले जाने के उद्देश्य से रावण कैलाश पर्वत को ही उठाने लगा।
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शिवजी ने अपने अंगूठे से पर्वत को दबा दिया
रावण जैसे ही पर्वत को उठाने लगा शिवजी ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया। जिससे कैलाश पर्वत के नीचे रावण का हाथ भी दब गया।
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दर्द में भी रावण भगवान शिव की भक्ति करता रहा
रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया और वह दर्द से चिल्ला उठा 'शंकर शंकर' - जिसका मतलब था क्षमा करिए और वह महादेव की स्तुति करने लगा। इस स्तुति को ही शिव तांडव स्तोत्र कहते हैं।
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दशानन की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने दिया उसे रावण नाम
कहा जाता है कि इस स्तोत्र से प्रसन्न होकर ही शिव जी ने लंकापति को 'रावण' नाम दिया था।
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रावण नाम का अर्थ
रावण का मतलब है- जो तेज आवाज में दहाड़ता हो।
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शिव ताण्डव स्तोत्र या शिवताण्डवस्तोत्रम् लंकापति रावण द्वारा गाया भगवान शिव का स्तोत्र है।
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