Dec 12, 2024
Credit: canva
कुंभ मेला हर तीन साल में एक बार उज्जैन, प्रयागराज, हरिद्वार, और नासिक में लगता है।
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जब कुंभ मेला हर 6 साल में मनाया जाता है तो इसे अर्ध कुंभ कहा जाता है। अर्ध कुंभ का आयोजन केवल दो स्थानों पर होता है - हरिद्वार और प्रयागराज।
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प्रत्येक 12 वर्ष पर मनाये जाने वाले कुम्भ मेले को पूर्ण कुम्भ मेला कहा जाता है। यह केवल प्रयागराज में होता है। पूर्ण कुंभ को कई लोग महाकुंभ भी कहते हैं। 2025 में प्रयागराज में लगने वाला कुम्भ मेला एक पूर्ण कुम्भ मेला है।
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जब 144 वर्ष के बाद कुम्भ मेला आयोजित होता है तो उसे महाकुम्भ कहते हैं। इस प्रकार का कुंभ मेला अत्यंत दुर्लभ है। बता दें 12 पूर्ण कुंभ के बाद ही महाकुंभ होता है। इसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं और इसे सबसे भव्य धार्मिक पर्व माना जाता है।
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कुंभ मेले के आयोजन स्थल का निर्धारण ग्रहों की स्थितियों के आधार पर होता है। इसके लिए खासतौर से गुरु और सूर्य की स्थिति देखी जाती है।
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जब बृहस्पति कुंभ राशि में होता है और सूर्य मेष राशि में होता है, तब हरिद्वार में महाकुंभ लगता है।
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जब सूर्य मेष राशि में और बृहस्पति सिंह राशि में होता है। तब उज्जैन में कुंभ मेला लहता है।
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नासिक में महाकुंभ मेला तब लगता है जब सूर्य और बृहस्पति दोनों आकाशीय नक्षत्र सिंह राशि में होते हैं। प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन तब होता है जब बृहस्पति ग्रह वृषभ राशि में और सूर्य मकर राशि में होता है।
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