Apr 06, 2025
By: Medha Chawlaउत्तराखंड में स्थित गोलू देवता का मंदिर न्याय के लिए प्रसिद्ध माना जाता है, जहां भक्त अपनी फरियाद चिट्ठियों में लिखकर देते हैं।
Credit: canva
इस मंदिर में लाखों की संख्या में घंटियां टंगी हैं जो भक्तों की पूरी हुई मनोकामनाओं का प्रतीक मानी जाती हैं।
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भक्त अपनी समस्याएं कागज पर लिखकर मंदिर में जमा करते हैं और जब उनकी इच्छाएं पूर्ण होती हैं तो वे घंटी चढ़ाकर भगवान को धन्यवाद करते हैं।
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लोक मान्यताओं के अनुसार गोलू देवता को भगवान शिव का अवतार माना जाता है और वे सत्य और न्याय के देवता के रूप में पूजे जाते हैं।
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उत्तराखंड की कई जगहों पर गोलू देवता के दरबार लगते हैं, जहां उनकी कृपा से भक्तों को न्याय मिलने की मान्यता है।
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मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही घंटियों की आवाज सुनाई देती है, जिससे यहां आध्यात्मिक और भक्तिमय माहौल बना रहता है।
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मंदिर के गर्भगृह में गोलू देवता की प्रतिमा स्थापित है जहां श्रद्धालु अपनी प्रार्थनाएं अर्पित करते हैं।
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ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार गोलू देवता को झाल राय और उनकी पत्नी कालिंका का पुत्र माना जाता है, जिनका जन्म स्थान चंपावत माना जाता है।
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ये भारत का एकमात्र मंदिर है जहां बिना किसी वकील या जज के भक्तों को न्याय मिलने की परंपरा चली आ रही है।
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