Apr 04, 2025
By: Medha Chawlaभगवान कृष्ण की 16,108 रानियों का उल्लेख भागवत पुराण में मिलता है और ये विषय अत्यधिक चर्चित और रहस्यमय है।
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ये 16,100 कन्याएं नरकासुर नामक राक्षस के बंदीगृह में थीं, जिन्हें भगवान कृष्ण ने मुक्त कर समाज में उनकी प्रतिष्ठा बचाने हेतु अपनाया था।
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भगवान कृष्ण ने लोक लाज से रक्षा के लिए उन्हें अपनी रानियों का दर्जा दिया और उनके साथ गृहस्थ जीवन नहीं अपनाया।
मातृत्व
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जब रानियों ने मातृत्व की इच्छा व्यक्त की तो भगवान कृष्ण ने उन्हें वरदान देकर संतानें प्रदान कीं।
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भागवत पुराण के अनुसार ये रानियां पूर्व जन्म में ऋषि थीं, जिन्होंने भगवान विष्णु से वरदान मांगा था कि वे भगवान कृष्ण की रानियां बनें।
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उन ऋषियों ने हजारों वर्षों तक तप कर ये वर प्राप्त किया था कि द्वापर युग में वे स्त्री रूप में भगवान कृष्ण को पति रूप में पाएं।
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देवी भागवत के अनुसार इन रानियों की उत्पत्ति भगवान शिव से हुई थी, अतः इन्हें शिवांश माना गया है।
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द्वापर युग के अंत में, भगवान कृष्ण के निधन के बाद सभी रानियां तपस्या करते हुए अपने मूल ऋषि रूप में लौट गईं।
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रानियों की ये कथा भगवान कृष्ण की दिव्यता और उनके द्वारा निभाई गई लीलाओं की गहराई को दर्शाती है।
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