Nov 25, 2025
बांके बिहारी जी का मंदिर विश्व प्रसिद्ध और बेहद चमत्कारी है। यहां रोज लाखों भक्त दर्शन को आते हैं।
Credit: ANI
स्वामी हरिदास जी के सामने श्रीकृष्ण और राधारानी एक साथ होकर प्रकट इस विग्रह रूप में आए थे। इस विग्रह का नाम हरिदास जी ने बांकेबिहारी रखा था।
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बांके बिहारी जी की मूर्ति अर्द्धनारीश्वर स्वरूप में है। मूर्ति में भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी विराजमान हैं।
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बांके बिहारी साल में केवल एक बार शरद पूर्णिमा पर महारास की मुद्रा में दर्शन देते हैं। इस समय वे बांसुरी धारण करते हैं।
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इस मंदिर की जमी महाराज जयसिंह द्वितीय के पुत्र महाराजा सवाई ईश्वरी सिंह द्वारा साल 1748 में दान में दी गई थी।
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बांके बिहारी के चरणों के दर्शन होली उत्सव के अंतिम 5 दिनों में और अक्षया तृतीया के दिन हो सकते हैं।
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माना जाता है कि बांके बिहारी बेहद ही कोमल हैं। बांसुरी से उनको चोट लग सकती है।
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बांके बिहारी की आंखों में अगर कोई भक्त प्यार से देख ले तो वो उसके साथ चले जाते हैं। इस कारण हर 2 से 5 मिनट में पर्दा गिराया जाता है।
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बांके बिहारी को एक बच्चे की तरह माना जाता है। इस कारण मंदिर में सुबह की आरती नहीं होती है। इसके साथ ही घंटियां भी नहीं होती है।
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