Jan 04, 2026
सूर्य से लगातार तेज़ रफ्तार कण निकलते रहते हैं, जिन्हें सोलर विंड कहते हैं। यही कण पूरे सौरमंडल के चारों ओर एक विशाल बुलबुला बनाते हैं।
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सूर्य और उसके ग्रह जिस बुलबुले के अंदर रहते हैं, उसे हेलियोस्फियर कहा जाता है। यह प्लूटो से भी तीन गुना दूर तक फैला है।
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जहां सूर्य की सोलर विंड और बाहरी अंतरिक्ष की हवा टकराती हैं, वहीं हेलियोपॉज़ होती है। यही सौरमंडल की असली सीमा मानी जाती है।
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हेलियोपॉज़ को कभी-कभी “Wall of Fire” कहा जाता है। यहां तापमान 30,000 से 50,000 केल्विन तक पाया गया।
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इतना तापमान होने के बावजूद वहां कण बहुत कम हैं। इसलिए गर्मी सैटेलाइट तक पहुंच ही नहीं पाई और वे सुरक्षित रहे।
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25 अगस्त 2012 को Voyager 1 पहला अंतरिक्ष यान बना जिसने हेलियोपॉज़ को पार किया।
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2018 में Voyager 2 भी इस सीमा के बाहर पहुंचा। दोनों यानों ने अलग-अलग दूरी पर यह सीमा पार की।
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हेलियोपॉज़ के बाहर और अंदर का चुंबकीय क्षेत्र लगभग एक जैसा है। यह खोज वैज्ञानिकों के लिए बड़ी हैरानी बनी।
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वैज्ञानिकों का मानना है कि सूर्य की गतिविधि के साथ हेलियोपॉज़ फैलती और सिकुड़ती रहती है, जैसे फेफड़े सांस लेते हैं।
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