Dec 27, 2025
मकसद चांद पर चलने वाले रोवर्स, लैब और रूस-चीन के साझा रिसर्च स्टेशन को लगातार बिजली देना। खासकर उस समय जब चांद पर करीब 14 दिन तक लंबी रात रहती है।
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रूस की सरकारी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने कहा है कि यह पावर प्लांट रूस और चीन के मिलकर बनाए जा रहे इंटरनेशनल लूनर रिसर्च स्टेशन के लिए बहुत जरूरी होगा।
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चांद पर एक दिन और एक रात करीब 14-14 दिन की होती है। वहां करीब 336 घंटे तक लगातार अंधेरा रहता है।
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इस दौरान सोलर पैनल से बिजली बनाना नामुमकिन हो जाता है। ऐसे में न्यूक्लियर पावर प्लांट लगातार बिजली दे सकता है।
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रोस्कोस्मोस के अनुसार, इस पावर प्लांट पर चांद पर चलने वाले रोबोटिक रोवर्स, साइंटिफिक मशीन और एक खास वेधशाला को बिजली मिलेगी।
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एजेंसी ने कहा कि यह कदम एक बार के मिशन से आगे बढ़कर लंबे समय तक चांग पर मौजूद रहने की दिशा में बड़ा कदम है।
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प्रोजेक्ट में रूस की न्यूक्लियर कंपनी रोसआटम और देश के बड़े न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर कुर्चातोन इंस्टीट्यूट भी शामिल हैं।
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रूस ने कहा कि इसे न्यूक्लियर रिएक्टर नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह तय है कि इसमें न्यूक्लियर ऊर्जा का इस्तेमाल होगा।
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रूस का कहना है कि इस मिशन का लक्ष्य 2036 रखा गया है। 2036 तक चांद पर पावर प्लांट बनाने की योजना है।
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