Dec 17, 2025
यह रहस्यमयी संरचना धरती से करीब 6,500 प्रकाश-वर्ष दूर ईगल नेबुला में स्थित है। इसे वैज्ञानिक भाषा में पिलर्स ऑफ क्रिएशन कहा जाता है।
Credit: Piyush Kumar
गैस और धूल से बने ये स्तंभ ऐसे फैलते दिखाई देते हैं, जैसे कोई विशाल हाथ अंतरिक्ष में आगे बढ़ रहा हो। यही वजह है कि इसे धार्मिक और रहस्यमयी नजर से देखा जा रहा है।
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साल 2022 में जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने इस संरचना की ऐतिहासिक तस्वीर ली। वेब की नियर-इन्फ्रारेड तकनीक ने वह हिस्सा भी दिखा दिया, जो पहले नजर नहीं आता था।
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इन स्तंभों के सिरे ऐसे दिखते हैं मानो उन पर लावा जमी हो। असल में यह चमक पास के विशाल तारों से निकलने वाली ऊर्जा और रेडिएशन की वजह से है।
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तारे किसी चमत्कार से नहीं बनते। गैस और धूल के विशाल बादल जब गुरुत्वाकर्षण के कारण सिकुड़ते हैं, तब उनके भीतर तापमान और दबाव बढ़ने लगता है।
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इन पिलर्स के अंदर कई नए तारे जन्म ले रहे हैं। तस्वीर में दिखने वाले छोटे-छोटे लाल बिंदु इन्हीं नवजात तारों का संकेत हैं, जिनकी उम्र कुछ लाख साल ही है।
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जब प्रोटोस्टार के केंद्र में तापमान करोड़ों डिग्री तक पहुंचता है, तब न्यूक्लियर फ्यूजन शुरू होता है। यही वह पल होता है, जब तारा वैज्ञानिक रूप से “जिंदा” माना जाता है।
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पहले ली गई तस्वीरों में ये स्तंभ घने और अपारदर्शी लगते थे, लेकिन जेम्स वेब टेलीस्कोप गैस और धूल के आर-पार झांकने में सक्षम है।
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वैज्ञानिक इन तस्वीरों से यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि तारे और सौर मंडल कैसे बनते हैं — ठीक वैसे ही, जैसे कभी हमारा सौर मंडल बना था।
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