Jan 06, 2026
अब पता चला है कि Betelgeuse अकेला नहीं है। उसके पास एक छोटा सा तारा घूम रहा है, जिसका नाम Siwarha रखा गया है। यह तारा इतना पास है कि पहले किसी को दिखा ही नहीं।
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Betelgeuse के चारों तरफ हवा जैसी गैस फैली हुई है। जब छोटा तारा उसमें से गुजरता है, तो पीछे एक लकीर बन जाती है — जैसे पानी में नाव चलाने पर पीछे लहर बनती है।
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वैज्ञानिकों ने 8 साल तक Betelgeuse की रोशनी देखी। उन्हें हर कुछ साल में एक जैसा बदलाव दिखा। इससे साफ हो गया कि कोई तारा उसके आगे-पीछे घूम रहा है।
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Betelgeuse में दो तरह के बदलाव होते हैं। एक छोटा बदलाव, जो उसके अंदर की हलचल से होता है। दूसरा बड़ा बदलाव, जो हर 6 साल में साथी तारे की वजह से होता है।
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2020 में Betelgeuse अचानक बहुत मंद दिखने लगा था। लोग डर गए थे कि कहीं यह फट तो नहीं जाएगा। अब पता चला कि यह साथी तारे की वजह से उठी गैस और धूल के कारण हुआ था।
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यह तारा इतना बड़ा है कि इसके अंदर लाखों सूरज आ सकते हैं। यह पृथ्वी के पास भी है, इसलिए वैज्ञानिक इसे अच्छे से देख सकते हैं और समझ सकते हैं।
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अभी छोटा तारा Betelgeuse के पीछे छिपा है। 2027 में वह फिर दिखेगा। तब वैज्ञानिक और साफ देख पाएंगे कि दोनों तारे एक-दूसरे पर कैसे असर डालते हैं।
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इससे वैज्ञानिक यह समझ पाएंगे कि बड़े तारे बूढ़े होने पर कैसे बदलते हैं और आखिर में कैसे फटते हैं। यह जानकारी पूरे ब्रह्मांड को समझने में मदद करेगी।
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लोगों के मन में सवाल है कि क्या Betelgeuse जल्द सुपरनोवा बनेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी ऐसा तुरंत नहीं होने वाला। लेकिन उसके आसपास हो रहे ये बदलाव बताते हैं कि तारा अपने जीवन के आखिरी दौर में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है।
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