Mar 09, 2026

मंगल के ऑर्बिटर का कमाल; सुपरस्टॉर्म को रेड प्लैनेट से टकराते देखा

Anurag Gupta

​मंगल से टकराया सुपरस्टॉर्म​

यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) के दो मंगल मिशनों Mars Express और ExoMars Trace Gas Orbiter ने मंगल पर एक सुपरस्टॉर्म का असर दर्ज किया।

Credit: ESA/NASA/iStock

​पृथ्वी पर भी पड़ा असर​

इस सौर तूफान का असर 11 मई, 2024 को पृथ्वी पर भी देखा गया था।

Credit: ESA/NASA/iStock

​भयावह सौर तूफान​

यह तूफान पिछले 20 वर्षों में पृथ्वी पर आए सबसे बड़े सौर तूफानों में से एक माना गया।

Credit: ESA/NASA/iStock

​आसमान का बदला रंग​

इस तूफान के चलते पृथ्वी पर सामान्य से ज्यादा ऑरोरा (Aurora) दिखाई दी।

Credit: ESA/NASA/iStock

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​मंगल पर क्या पड़ा असर​

जब यह सौर तूफान मंगल ग्रह से टकराया तो वहां के ऊपरी वायुमंडल में बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉन भर गए।

Credit: ESA/NASA/iStock

​इलेक्ट्रॉन की हुई वृद्धि​

मंगल के वायुमंडल में 110 किमी ऊंचाई पर इलेक्ट्रॉनों में 45 फीसदी, जबकि 130 किमी की ऊंचाई पर 278 फीसदी तक वृद्धि हुई, जो अबतक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।

Credit: ESA/NASA/iStock

​कंप्यूटर सिस्टम प्रभावित​

सौर तूफान के कारण दोनों ऑर्बिटर के कंप्यूटर सिस्टम में अस्थायी गड़बड़ी भी हुई। हालांकि, जल्द ही सिस्टम सामान्य हो गया।

Credit: ESA/NASA/iStock

​रेडियो ऑकल्टेशन तकनीक ​

वैज्ञानिकों ने इस घटना का अध्ययन करने के लिए रेडियो ऑकल्टेशन तकनीक का उपयोग किया।

Credit: ESA/NASA/iStock

​क्या एक समान होता है असर?​

अध्ययन से पता चला कि सौर तूफानों के प्रति मंगल और पृथ्वी की प्रतिक्रिया अलग-अलग होती है।

Credit: ESA/NASA/iStock

​क्या कुछ है खास​

इस तकनीक में एक अंतरिक्ष यान दूसरे को रेडियो सिग्नल भेजता है और वायुमंडल से गुजरते समय उसमें होने वाले बदलावों को मापा जाता है।

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