Dec 12, 2025
ऑस्टिन में टेक्सास यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने मंगल ग्रह पर इस सिस्टम की मैपिंग की है। इस स्टडी की वजह से ग्रह पर पानी के पुराने नेटवर्क की जानकारी मिली है।
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PNAS में पब्लिश हुई स्टडी में 16 बड़े नदी बेसिन की पहचानी की गई है। इनकी एक पूरी आउटलाइन भी बताई गई है, जो मंगल ग्रह के बड़े पैमाने पर ड्रेनेड सिस्टम की पहली पूरी मैपिंग है।
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रिसर्च के मुताबिक, अरबों सा पहले बारिश ने मंगल ग्रह पर घाटियां और नदियां बनाई थी। इससे पानी घाटियों और शायद बड़े पुराने समुद्रों में पहुंच गया। स्टडी की मानें तो इससे मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना भी बनी होगी।
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इस रिसर्च को लीड करने वाले एक्सपर्ट का कहना है कि यह लंबे समय से जानते हैं कि मंगल ग्रह पर नदियां थी। हालांकि, हमें यह जानकारी नहीं है कि नदियों का आकार कितना बड़ा था।
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रिसर्चर्स ने वैली नेटवर्क, नदियां, झीलों, कैन्यन और सेडिमेंट डिपॉजिट के 19 बड़े कलस्टर की पहचान की। इनमें से 16 ने 1,00,000 स्क्वायर किलोमीटर से बड़े वाटरशेड बनाए गए।
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यूटी जैक्सन स्कूल ऑफ जियोसाइंसेज के सहायक प्रोफेसर टिमोथी ए. गौडगे और पोस्टडॉक्टरल फेलो अब्दुल्ला एक.जकी ने मंगल पर नदियों का नक्शा बनाया है। उन्होंने पहले से मौजूद मंगल ग्रह की घाटियों, झीलों और नदियों के डेटा को इकट्ठा किया और मिलाया।
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धरती के उलट मंगल ग्रह पर कम बड़े ड्रेनेज सिस्टम है। यह अंतर ग्रह पर टेक्टोनिक एक्टिविटी की कमी की वजह से है, जो धरती पर अलग-अलग तरह की टोपोग्राफी बनाती है।
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मंगल का ज्यादातर हिस्सा छोटे ड्रेनेज सिस्टम के पैचवर्क से ढका है। इनमें से हर एक जीवन की संभावना के लिए सही हो सकता है।
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इस ड्रेनेज एरिया की वजह से वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में मंगल पर जीवन संभव भी हो सकता है।
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