Jan 06, 2026
यूनिवर्स की सबसे महंगी चीज का नाम 'एंटीमैटर' यानी 'प्रति पदार्थ' (Antimatter) है। इसके एक ग्राम की कीमत से दुनिया के कई छोटे देश खरीदे जा सकते हैं।
Credit: NASA/istock
नासा के मुताबिक इसके एक ग्राम की कीमत करीब 90 ट्रिलियन डॉलर (करीब 63 लाख अरब रुपये) है।
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एंटीमैटर हमारे आसपास के वातावरण या धरती पर नहीं पाया जाता है, बल्कि इसे लैब तैयार किया जाता है और इसका इस्तेमाल अंतरिक्ष से जुड़े कामों में होता है।
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वैज्ञानिकों ने एंटीमैटर के बारे में सबसे पहले अंतरिक्ष से जाना था। अंतरिक्ष में ब्लैक होल द्वारा तारों के दो हिस्सों में टूटने की घटना में एंटीमैटर पैदा होता है। फिर इस पर रिसर्च की गई।
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इसे बनाना बेहद जटिल और महंगा है। एंटीमैटर केवल पार्टिकल एक्सेलरेटर (जैसे CERN) में बनती है और 1 ग्राम बनाने के लिए अपार ऊर्जा चाहिए।
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इसे रखने के लिए विशेष उपकरणों की जरूरत होती है, वरना ये सामान्य पदार्थ से टकराकर नष्ट हो जाता है।
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एंटीमैटर के बारे में सबसे पहले ब्रिटिश भौतिकशास्त्री पॉल डिराक (Paul Dirac) ने बताया था। 1928 में डिराक ने अपने पेपर में पॉजिट्रॉन (एंटी-इलेक्ट्रॉन) की संभावना बताई।
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ऊर्जा का बहुत बड़ा स्रोत होने की वजह से यह बेहद काम का है, भविष्य में ये अंतरिक्ष यात्रियों को तेजी से दूसरे ग्रहों तक ले जा सकता है।कैंसर के इलाज में रेडियोथेरेपी के लिए इसका उपयोग हो सकता है।
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