Dec 17, 2024

यूं ही नहीं बनते चैम्पियन, डी गुकेश की बॉडी लैंग्वेज में छिपा है सफलता का रामबाण

Suneet Singh

​चैंपियन गुकेश​


शतरंज ग्रैंडमास्टर डी गुकेश मौजूदा विश्व शतरंज चैंपियन हैं। इस साल दिसंबर में वे सबसे कम उम्र के विश्व शतरंज चैंपियन बने।

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​सेलिब्रेशन की क्लिप​


विश्व चैंपियनशिप जीतने के बाद गुकेश का एक वीडियो आया जिसमें उनका रिएक्शन देख कर कई तरह की सीख मिलती है।

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​विजेता के गुण​


गुकेश के जीतने के बाद रोते हुए जिस संयम से अपने चेसबोर्ड को फिर सजाया इसको लेकर सोशल मीडिया पर खूब चर्चाएं हुईं। आइए उनसे सीखते हैं विजेता के असली आचरण के बारे में।

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​शांत और संयमित​


जैसे ही गुकेश को ये महसूस हुआ कि वो जीत गए और दुनिया के सबसे युवा चेस चैंपियन बन गए, उनकी खुशी असीम थी लेकिन वो उछले नहीं। शांति से वो अपनी कुर्सी पर बैठे रहे।

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​कृतज्ञ​


जीतने के बाद वो खुशी से रोने लगे और इसके साथ ही उन्होंने अपने गुरु और माता-पिता के प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर की।

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​बॉडी लैंग्वेज​


रोते और साथ-साथ मुस्कुराते गुकेश को जब किसी ने बधाई दी तो उन्होंने आराम से खड़े होकर उनकी बधाई को स्वीकारा। उन्होनें भावनाओं को अपनी बॉडी लैंग्वेज पर हावी नहीं होने दिया।

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​खेल भावना​


मैच के बाद गुकेश ने अपनी परंपरा के अनुसार सारे चेस के पीसेज को अपनी जगह पर सजाया और वहां से उठते समय अपनी कुर्सी भी सही जगह रखी।

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​अनुशासन​


मैच से लेकर सेलिब्रेशन तक के पूरे समय में डी गुकेश अनुशासित रहे और इसी अनुशासन की वजह से उनके हाथ सफलता आई।

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​निरंतरता​


गुकेश की सबसे खास बातों में उनकी कंसिसटेंसी भी है। अपनी सारी पारियों के दौरान उन्होंने अपने इन गुणों को बनाए रखा और मैच जीते।

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