Oct 20, 2026

विजयदशमी 2026 पर पढ़ें भगवान राम पर लिखे ये दोहे

Suneet Singh

​राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस। बरषत वारिद-बूँद गहि, चाहत चढ़न अकास॥​

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​तुलसी ममता राम सों, समता सब संसार। राग न रोष न दोष दुख, दास भए भव पार॥​

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​रैदास हमारौ राम जी, दशरथ करि सुत नाहिं। राम हमउ मांहि रहयो, बिसब कुटंबह माहिं॥​

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​दंपति रस रसना दसन, परिजन बदन सुगेह। तुलसी हर हित बरन सिसु, संपति सहज सनेह॥​

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​तुलसी परिहरि हरि हरहि, पाँवर पूजहिं भूत। अंत फजीहत होहिंगे, गनिका के से पूत॥​

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​राम भरोसो राम बल, राम नाम बिस्वास। सुमिरत सुभ मंगल कुसल, मांगत तुलसीदास॥​

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​राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस। बरसत बारिद बूँद गहि, चाहत चढ़न अकास॥​

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​हरे चरहिं तापहिं बरे, फरें पसारहिं हाथ। तुलसी स्वारथ मीत सब, परमारथ रघुनाथ॥​

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​सुख सागर नागर नवल, कमल बदन द्युतिमैन करुणा कर वरुणादिपति, शरणागत सुख दैन॥​

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