Apr 18, 2025

पसीने पर 10 मशहूर शेर: न मैं समझा न आप आए कहीं से, पसीना पोछिए अपनी जबीं से

Suneet Singh

​रुख़ पर पसीना जिस्म में रअशा जबीं प चीं, पूछा किधर चले तो ये बोले कहीं नहीं​



​- मीर अनीस


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​आंखों का अर्क़ रौगन-ए-बादाम से बेहतर, आरिज़ का पसीना है गुलाब-ए-गुल-ए-अहमर​



​- मिर्ज़ा सलामत अली दबीर


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​पसीने से मिरे अब तो ये रूमाल, है नक़्द-ए-नाज़-ए-उल्फ़त का ख़ज़ीना​​



​- जौन एलिया


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​ये पसीना वही आंसू हैं जो पी जाते थे हम, 'आरज़ू' लो वो खुला भेद वो टूटा पानी​​



​- आरज़ू लखनवी


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​हो गया मिट्टी अगर मेरा पसीना सूख कर, देखना मेरे दरख़्तों पर समर आ जाएगा​​



​- आसिम वास्ती


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​हलाल रिज़्क़ का मतलब किसान से पूछो, पसीना बन के बदन से लहू निकलता है​​



​- आदिल रशीद


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​मिला दिया है पसीना भले ही मिट्टी में, हम अपनी आंख का पानी बचा के रखते हैं​​



​- हस्तीमल हस्ती


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​अब इत्र भी मलो तो तकल्लुफ़ की बू कहां, वो दिन हवा हुए जो पसीना गुलाब था​​



​- लाला माधव राम जौहर


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​माथे पे पसीना क्यूं आंखों में नमी कैसी, कुछ ख़ैर तो ही तुम ने क्या हाल-ए-जिगर देखा​​



​- जिगर मुरादाबादी


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