Jan 13, 2026

पतंग पर शायरी: मैं हूं पतंग-ए-कागजी, डोर है उस के हाथ में

Suneet Singh

​फिर पूछना कि कैसे भटकती है ज़िंदगी, पहले किसी पतंग की मानिंद कट के देख.. ​



​- नज़ीर बाक़री


Credit: Pexels

​कोठों पे मुंह-अंधेरे सितारे उतर पड़े, बन के पतंग मैं भी हवा में उड़ा किया..​



​- मोहम्मद अल्वी


Credit: Pexels

​ये जो लाल पतंग का सरे आसमां है उड़ा हुआ, ये चराग दस्तएहिना का है जो हवा में उसने जला दिया ​



- मुनीर नियाज़ी


Credit: Pexels

​उड़ रहे हैं शहर में पतंग रंग रंग, जगमगा उठा गगन बसंत आ गई ​



​- नासिर काज़मी


Credit: Pexels

You may also like

पंजाबियों के घर की शोभा बढ़ाती हैं ये टॉ...
​बार्बी डॉल लुक में दुल्हन बनीं नुपुर सै...

​शब शम्अ' पर पतंग के आने को इश्क़ है, उस दिल-जले के ताब के लाने को इश्क़ है ​



​- मीर तक़ी मीर


Credit: Pexels

​चले मक़्तल की जानिब और छाती खोल दी हम ने, बढ़ाने पर पतंग आए तो चर्ख़ी खोल दी हम ने ​



​- मुनव्वर राना


Credit: Pexels

​मैं हूं पतंग-ए-काग़ज़ी डोर है उस के हाथ में, चाहा इधर घटा दिया चाहा उधर बढ़ा दिया ​



​- नज़ीर अकबराबादी


Credit: Pexels

​गर्म-रौ राह-ए-फ़ना का नहीं हो सकता पतंग, उस से तो शम्अ-नमत सर भी कटाया न गया ​



​- मीर तक़ी मीर


Credit: Pexels

​क्या आसमाँ उठाते मोहब्बत में जब कि दिल, तार-ए-निगह में उलझी हुई इक पतंग था ​



​- अमीर हम्ज़ा साक़िब


Credit: Pexels

इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स

Next: पंजाबियों के घर की शोभा बढ़ाती हैं ये टॉप रंगोली डिजाइन, देखें लेटेस्ट, सिंपल रंगोली फोटो

ऐसी और स्टोरीज देखें