Dec 17, 2025

हिजाब पर 10 मशहूर शेर: हुस्न को बे-हिजाब होना था, शौक़ को कामयाब होना था

Suneet Singh

​इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में, या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर​​



​- अल्लामा इक़बाल


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​अदा आई जफ़ा आई ग़ुरूर आया हिजाब आया, हज़ारों आफ़तें ले कर हसीनों पर शबाब आया​​



​- नूह नारवी


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​इक हिजाब-ए-तह-ए-इक़रार है माने वर्ना, गुल को मालूम है क्या दस्त-ए-सबा चाहता है​​



​- परवीन शाकिर


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​अफ़्लाक से आता है नालों का जवाब आख़िर, करते हैं ख़िताब आख़िर उठते हैं हिजाब आख़िर​​



​- अल्लामा इक़बाल


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​निगाह-ए-शौक़ सर-ए-बज़्म बे-हिजाब न हो, वो बे-ख़बर ही सही इतने बे-ख़बर भी नहीं​​



​- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़


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​क्यूंकर छुपे न माह-ए-दो-हफ़्ता हिजाब से, चौदा तबक़ में नूर है उस आफ़्ताब से​​



​- मीर अनीस


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​मय ने किया है हुस्न-ए-ख़ुद-आरा को बे-हिजाब, ऐ शौक़! हां इजाज़त-ए-तस्लीम-ए-होश है​​



​- मिर्ज़ा ग़ालिब


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​इस इक हिजाब पे सौ बे-हिजाबियां सदक़े, जहां से चाहता हूं तुम को देखता हूं मैं​​



​- असरार-उल-हक़ मजाज़


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​इश्क़ भी हो हिजाब में हुस्न भी हो हिजाब में, या तो ख़ुद आश्कार हो या मुझे आश्कार कर​​



​- अल्लामा इक़बाल


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