Jul 12, 2025

सावन पर 10 मशहूर शेर: उलझी उलझी है ज़ुल्फ़ सावन की, बरसा बरसा शबाब आंखों से

Suneet Singh

​मगर मुझ को लौटा दो बचपन का सावन, वो काग़ज़ की कश्ती वो बारिश का पानी​​



​- सुदर्शन फ़ाकिर


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​किस को खबर थी सांवले बादल बिन बरसे उड़ जाते हैं, सावन आया लेकिन अपनी किस्मत में बरसात नहीं​​



​- क़तील शिफ़ाई


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​बीत गया सावन का महीना मौसम ने नज़रें बदलीं, लेकिन इन प्यासी आँखों से अब तक आंसू बहते हैं​​



​- हबीब जालिब


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​फिर सावन रुत की पवन चली तुम याद आए, फिर पत्तों की पाज़ेब बजी तुम याद आए​​



​- नासिर काज़मी


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सावन में सबसे सुंदर लगती हैं ऐसी साड़िया...

​तुम छत पे नहीं आए मैं घर से नहीं निकला, ये चांद बहुत भटका सावन की घटाओं में​​



​- बशीर बद्र


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​कोई छींटा पड़े तो 'दाग़' कलकत्ते चले जाएं, अज़ीमाबाद में हम मुंतज़िर सावन के बैठे हैं​​



​- दाग़ देहलवी


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​अब के सावन में शरारत ये मिरे साथ हुई, मेरा घर छोड़ के कुल शहर में बरसात हुई​​



​- गोपालदास नीरज


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​ये जुदाई की घड़ी है कि झड़ी सावन की, मैं जुदा गिर्या-कुनां अब्र जुदा यार जुदा​​



​- अहमद फ़राज़


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​घटाओं की आमद को सावन तरसते, फ़ज़ाओं में बहकी बग़ावत न होती​​



​- साग़र सिद्दीक़ी


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