Aug 28, 2024

'अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं..', दिल के जख्मों पर मरहम की तरह हैं साहिर के ये शेर

Suneet Singh

​रोना आया​

​हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को,
​क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया..

Credit: facebook

​चेहरे​

​देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से,
​चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से..


Credit: facebook

​फूल​

​हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें,
​वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं..


Credit: facebook

​चला गया..​

​ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ, मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया..


Credit: facebook

You may also like

रोज पहनने के लिए बेस्ट हैं सोने के ऐसे झ...
पुराने हुए बोट-गोल गले के ब्लाउज.. अब छप...

​नजर​

​ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है, क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम..


Credit: facebook

​बे-दिली​

तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम,
​ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम


Credit: facebook

​मोहब्बत​

​अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं, ​तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी


Credit: facebook

​सिला​

​आप दौलत के तराज़ू में दिलों को तौलें,
​हम मोहब्बत से मोहब्बत का सिला देते हैं


Credit: facebook

​अफसाना​

​वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन,
​उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा।


Credit: facebook

इस स्टोरी को देखने के लिए थॅंक्स

Next: रोज पहनने के लिए बेस्ट हैं सोने के ऐसे झुमके, देखें GOLD EARRINGS के 10 बेहतरीन डिजाइन

ऐसी और स्टोरीज देखें