Apr 14, 2024
साहिर लुधियानवी की नज़्में कई दशक से सुनने वालों के दिल जीत रही हैं। आइए डालते हैं उनके कुछ चुनिंदा शेरों पर एक नजर:
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन,
उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा।
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हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उन को,
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया।
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तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही,
तुझ से मिल कर उदास रहता हूँ।
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देखा है ज़िंदगी को कुछ इतने क़रीब से,
चेहरे तमाम लगने लगे हैं अजीब से।
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हज़ार बर्क़ गिरे लाख आँधियाँ उट्ठें,
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं।
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है,
क्यूँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम।
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तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम,
ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम।
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अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं,
तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी।
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