Sep 22, 2025

सबा अकबराबादी के 10 मशहूर शेर: गलत-फहमियों में जवानी गुजारी, कभी वो न समझे कभी हम न समझे

Suneet Singh

​अपने जलने में किसी को नहीं करते हैं शरीक, रात हो जाए तो हम शम्अ बुझा देते हैं​

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​समझेगा आदमी को वहां कौन आदमी, बंदा जहां ख़ुदा को ख़ुदा मानता नहीं​

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​इक रोज़ छीन लेगी हमीं से ज़मीं हमें, छीनेंगे क्या ज़मीं के ख़ज़ाने ज़मीं से हम​

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​आप के लब पे और वफ़ा की क़सम, क्या क़सम खाई है ख़ुदा की क़सम​

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​सौ बार जिस को देख के हैरान हो चुके, जी चाहता है फिर उसे इक बार देखना​

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​कब तक नजात पाएंगे वहम ओ यक़ीं से हम, उलझे हुए हैं आज भी दुनिया ओ दीं से हम​

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​अच्छा हुआ कि सब दर-ओ-दीवार गिर पड़े, अब रौशनी तो है मिरे घर में हवा तो है​

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​रौशनी ख़ुद भी चराग़ों से अलग रहती है, दिल में जो रहते हैं वो दिल नहीं होने पाते​

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​आईना कैसा था वो शाम-ए-शकेबाई का, सामना कर न सका अपनी ही बीनाई का​

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