Sep 12, 2025
सौंदर्य को देखकर पुरुष विचलित हो जाता है, नारी भी होती होगी। फिर भी सत्य यह है कि सौंदर्य आनंद नहीं समाधि है।
Credit: Pixabay
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स्वार्थ हर तरह की भाषा बोलता है, हर तरह की भूमिका अदा करता है, यहां तक कि नि:स्वार्थता की भाषा भी नहीं छोड़ता।
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