Jun 18, 2025
निदा फाजली के 10 मशहूर शेर: हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी, फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी
Suneet Singh
ये शहर है कि नुमाइश लगी हुई है कोई, जो आदमी भी मिला बन के इश्तिहार मिला
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पहले हर चीज़ थी अपनी मगर अब लगता है, अपने ही घर में किसी दूसरे घर के हम हैं
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कहां चराग़ जलाएं कहां गुलाब रखें, छतें तो मिलती हैं लेकिन मकां नहीं मिलता
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बिखरी ज़ुल्फ़ों ने सिखाई मौसमों को शायरी, झुकती आंखों ने बताया मयकशी क्या चीज़ है
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ख़ुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को, बदलते वक़्त पे कुछ अपना इख़्तियार भी रख
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किसी के वास्ते राहें कहां बदलती हैं, तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो
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वही हमेशा का आलम है क्या किया जाए, जहां से देखिए कुछ कम है क्या किया जाए
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यक़ीन चांद पे सूरज में एतबार भी रख, मगर निगाह में थोड़ा सा इंतिज़ार भी रख
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बाग़ में जाने के आदाब हुआ करते हैं, किसी तितली को न फूलों से उड़ाया जाए
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